ईवी चालकों के लिए ‘मुफ़्त सवारी’ का दौर ख़त्म, सड़क उपयोग शुल्क पर सरकार की नज़र

ईवी चालकों के लिए ‘मुफ़्त सवारी’ का दौर ख़त्म, सड़क उपयोग शुल्क पर सरकार की नज़र

कैनबरा — ऑस्ट्रेलियाई सरकार अब इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के चालकों से सड़क उपयोग शुल्क वसूलने की तैयारी में है। ख़ज़ाना मंत्री जिम चाल्मर्स ने साफ़ संकेत दिए हैं कि यह योजना प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाई जाएगी, ताकि देश के घटते राजस्व और बढ़ते बुनियादी ढाँचा खर्च के बीच संतुलन बनाया जा सके।

पेट्रोल और डीज़ल वाहनों पर लगने वाला फ्यूल एक्साइज टैक्स लंबे समय से सरकार के लिए परिवहन अवसंरचना का प्रमुख स्रोत रहा है। लेकिन जैसे-जैसे ऑस्ट्रेलियाई नागरिक इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर रुख कर रहे हैं, यह राजस्व तेज़ी से घट रहा है। चाल्मर्स का कहना है, “हम सभी को सड़कों के रख-रखाव और निर्माण के लिए अपना उचित योगदान देना होगा। तकनीक बदल रही है, तो टैक्स व्यवस्था भी बदलनी होगी।”

क्यों ज़रूरी समझ रही है सरकार
सरकार का तर्क है कि वर्तमान व्यवस्था पेट्रोल-डीज़ल वाहन मालिकों पर असमान बोझ डालती है। ईवी चालकों को फिलहाल फ्यूल एक्साइज नहीं देना पड़ता, जबकि वे भी सड़कों और अन्य परिवहन ढाँचों का उतना ही इस्तेमाल करते हैं। रोड-यूज़र चार्ज लागू होने पर, सभी वाहन चालक अपनी दूरी या उपयोग के आधार पर भुगतान करेंगे।

विशेषज्ञों और उद्योग की राय
ऑटोमोबाइल उद्योग के कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि यह नीति राजस्व घाटा पाटने और लंबी अवधि में सड़क अवसंरचना को बनाए रखने के लिए तार्किक है। हालांकि, उनका सुझाव है कि शुरुआती वर्षों में शुल्क कम रखा जाए, ताकि ईवी अपनाने की प्रक्रिया बाधित न हो।
पर्यावरण संगठनों का कहना है कि ईवी पर टैक्स लगाने से उत्सर्जन घटाने के राष्ट्रीय लक्ष्यों को नुकसान हो सकता है। वे चाहेंगे कि सरकार ईवी के लिए प्रोत्साहन योजनाओं को बरकरार रखते हुए, शुल्क को धीरे-धीरे लागू करे।

आगे की राह
वित्त मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि इस रोड-यूज़र चार्ज को अगले संघीय बजट या नए वित्तीय वर्ष से लागू करने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। प्रारंभिक चरण में यह शुल्क राज्य और क्षेत्रीय सरकारों के सहयोग से एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में भी शुरू किया जा सकता है।

नीति को लेकर बहस तेज़ है — एक ओर सरकार इसे “राजस्व न्याय” का मामला बता रही है, तो दूसरी ओर आलोचकों का मानना है कि यह ईवी खरीदारों के लिए हतोत्साहित करने वाला कदम होगा। अब देखना होगा कि बजट पेश होने पर यह योजना किस रूप में सामने आती है।