एपस्टीन फाइल्स से हिली ब्रिटिश सत्ता, स्टार्मर की कुर्सी खतरे में

प्रधानमंत्री कीएर स्टार्मर पर इस्तीफे का दबाव, लेबर पार्टी में असंतोष गहराया

एपस्टीन फाइल्स से हिली ब्रिटिश सत्ता, स्टार्मर की कुर्सी खतरे में

लंदन।
दिवंगत यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़े नए खुलासों ने ब्रिटेन की राजनीति में गंभीर संकट पैदा कर दिया है। इन खुलासों की आंच अब सीधे प्रधानमंत्री कीएर स्टार्मर तक पहुंच गई है। उनकी सरकार के दो वरिष्ठ सहयोगियों के इस्तीफे के बाद सत्तारूढ़ लेबर पार्टी के भीतर नेतृत्व परिवर्तन की मांग तेज हो गई है।

सूत्रों के अनुसार, सोमवार को प्रधानमंत्री स्टार्मर ने अपनी पार्टी के सांसदों के साथ बंद कमरे में बैठक कर उन्हें पद पर बने रहने का समर्थन देने की अपील की। उन्होंने तर्क दिया कि उनका कार्यकाल अभी लगभग डेढ़ वर्ष का ही रहा है और इस अल्प अवधि में उन्हें हटाना सरकार व पार्टी—दोनों के लिए नुकसानदेह होगा। हालांकि, पार्टी के भीतर असंतोष कम होने के बजाय और मुखर होता दिखाई दे रहा है।

चीफ ऑफ स्टाफ के इस्तीफे से बढ़ा दबाव

विवाद की जड़ 2024 में लिया गया वह फैसला है, जिसमें स्टार्मर ने पीटर मैंडेलसन को एक प्रमुख राजनयिक पद पर नियुक्त किया था। यह नियुक्ति ऐसे समय में की गई जब एपस्टीन के साथ मैंडेलसन की कथित मित्रता और संपर्कों की जानकारी सार्वजनिक हो चुकी थी।

रविवार को प्रधानमंत्री कार्यालय के चीफ ऑफ स्टाफ मॉर्गन मैकस्वीनी के इस्तीफे के बाद स्थिति और गंभीर हो गई। इसके बाद से ही लेबर पार्टी के कई सांसद खुलकर नेतृत्व पर सवाल उठा रहे हैं।

पार्टी के भीतर मतभेद, विपक्ष का हमला

लेबर पार्टी की वरिष्ठ सांसद एमिली थॉर्नबेरी ने कहा कि हालिया घटनाक्रम के बाद पार्टी को “नई शुरुआत” की आवश्यकता है। उनका मानना है कि विवादों से पार्टी की छवि को गहरा नुकसान पहुंचा है।

जनमत सर्वेक्षणों में भी लेबर पार्टी की स्थिति कमजोर होती दिख रही है। पार्टी को दक्षिणपंथी रिफॉर्म यूके से पिछड़ते हुए बताया जा रहा है, जिससे नेतृत्व पर दबाव और बढ़ गया है।

उधर, विपक्षी कंजर्वेटिव पार्टी की नेता केमी बैडेनोच ने सरकार पर गलत फैसले लेने और नैतिक जिम्मेदारी निभाने में विफल रहने का आरोप लगाया है।

आगे और खुलासों की आशंका

पार्टी सांसदों का कहना है कि एपस्टीन से जुड़े मामले में अभी और दस्तावेज़ सामने आ सकते हैं, जिससे संकट और गहरा सकता है। ऐसे में प्रधानमंत्री स्टार्मर के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी पार्टी को एकजुट रखना और राजनीतिक विश्वसनीयता बहाल करना है।

अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि प्रधानमंत्री इस अभूतपूर्व दबाव से कैसे निपटते हैं और क्या वे अपनी कुर्सी बचा पाते हैं या ब्रिटेन को जल्द ही नए नेतृत्व का सामना करना पड़ेगा।