असम में बनी नॉर्थ ईस्ट की पहली इमरजेंसी एयर स्ट्रिप, IAF की ताकत में इज़ाफा

असम में बनी नॉर्थ ईस्ट की पहली इमरजेंसी एयर स्ट्रिप, IAF की ताकत में इज़ाफा

नई दिल्ली/गुवाहाटी।
भारत ने चीन सीमा से सटे संवेदनशील क्षेत्रों में रणनीतिक मजबूती की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। भारतीय वायुसेना (IAF) की ताकत को बढ़ाने के लिए असम में पूर्वोत्तर भारत की पहली इमरजेंसी एयर स्ट्रिप तैयार कर ली गई है। यह एयर स्ट्रिप अब IAF के फाइटर जेट्स और अन्य सैन्य विमानों की आपातकालीन लैंडिंग के लिए उपयोग में लाई जा सकेगी।

रणनीतिक दृष्टिकोण से अहम स्थान
यह इमरजेंसी एयर स्ट्रिप असम के नुमालीगढ़-खानापारा कॉरिडोर के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग-37 (NH-37) पर बनाई गई है, जो कि चीन की सीमा से बेहद नज़दीक है। यह क्षेत्र अरुणाचल प्रदेश के संवेदनशील सीमाई इलाकों के बेहद करीब है और वहां से सटे इलाकों में चीन की गतिविधियों पर नज़र बनाए रखना भारत के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत आवश्यक है।

बड़ी तैयारी, तेज़ी से निर्माण
इस एयर स्ट्रिप की लंबाई लगभग 3 किलोमीटर है और यह फाइटर जेट्स की लैंडिंग के लिए उपयुक्त रूप से तैयार की गई है। इसका निर्माण राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और भारतीय वायुसेना के संयुक्त सहयोग से हुआ है। किसी भी आपात स्थिति में इस एयर स्ट्रिप का उपयोग युद्धक विमानों, मालवाहक विमानों या राहत सामग्री पहुंचाने के लिए किया जा सकेगा।

IAF की ताकत को मिलेगा नया बल
पूर्वोत्तर क्षेत्र में यह पहली ऐसी सुविधा है, जो भारतीय वायुसेना की ऑपरेशनल क्षमता को सीमावर्ती इलाकों में कई गुना बढ़ा देगी। अब भारतीय वायुसेना सीमावर्ती क्षेत्रों में तेजी से अपनी प्रतिक्रिया दे सकेगी और किसी भी चुनौती से निपटने में सक्षम होगी।

रक्षा विशेषज्ञों की राय
रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यह एयर स्ट्रिप चीन की आक्रामक नीतियों के बीच भारत की मजबूत रणनीति का हिस्सा है। इससे भारत की सीमाई तैयारियों को मजबूती मिलेगी और पड़ोसी देशों को यह संदेश जाएगा कि भारत अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए पूरी तरह से तैयार है।