ULC घोटाला: पूर्व DGP पर फडणवीस–शिंदे को फंसाने की साजिश का गंभीर आरोप, जांच रिपोर्ट से बड़ा खुलासा

ULC घोटाला: पूर्व DGP पर फडणवीस–शिंदे को फंसाने की साजिश का गंभीर आरोप, जांच रिपोर्ट से बड़ा खुलासा

मुंबई। महाराष्ट्र में वर्ष 2021 से चर्चा में रहे अर्बन लैंड सीलिंग (ULC) घोटाले को लेकर एक बड़ा और सनसनीखेज खुलासा सामने आया है। राज्य के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) संजय पांडे पर आरोप है कि उन्होंने तत्कालीन राजनीतिक हालात का लाभ उठाते हुए वरिष्ठ नेताओं को झूठे मामलों में फंसाने की साजिश रची। आरोप है कि इस साजिश के तहत वर्तमान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को ULC घोटाले में आरोपी बनाने की कोशिश की गई।

सूत्रों के मुताबिक, एक हालिया जांच रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उस समय कुछ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव बनाया गया था। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट रूप से “केस बनाओ और अरेस्ट करो” जैसे निर्देश दिए गए, ताकि फडणवीस और शिंदे की छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके।

जांच रिपोर्ट में क्या सामने आया

जांच दस्तावेजों के अनुसार, कथित साजिश के तहत ULC से जुड़े मामलों की फाइलों को चुनिंदा तरीके से आगे बढ़ाया गया। उन मामलों को प्राथमिकता दी गई, जिनका राजनीतिक रूप से इस्तेमाल किया जा सकता था। आरोप है कि कानूनी तथ्यों और प्रक्रियाओं की अनदेखी करते हुए केवल राजनीतिक उद्देश्य से कार्रवाई की रूपरेखा तैयार की गई।

इस पूरे प्रकरण में तत्कालीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी रश्मि शुक्ला का नाम भी रिपोर्ट में सामने आया है। हालांकि, अब तक न तो पूर्व DGP और न ही अन्य संबंधित अधिकारियों की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक बयान दिया गया है।

राजनीतिक हलकों में बढ़ी हलचल

मामले के सामने आते ही महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। सत्तापक्ष का कहना है कि यह खुलासा साबित करता है कि किस तरह सत्ता के दुरुपयोग के जरिए राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने की कोशिश की गई। वहीं विपक्ष ने पूरे मामले को गंभीर बताते हुए इसकी स्वतंत्र और न्यायिक जांच की मांग की है।

सरकार का रुख

राज्य सरकार के सूत्रों का कहना है कि ULC घोटाले से जुड़े सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। यदि जांच में यह साबित होता है कि किसी अधिकारी ने अपने पद और अधिकारों का दुरुपयोग किया है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने यह भी दोहराया है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है, चाहे वह कितना ही बड़ा अधिकारी क्यों न हो।