सिडनी। ऑस्ट्रेलियन काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन्स (ACTU) ने देश के करोड़ों कर्मचारियों के लिए कामकाजी ढांचे में बड़ा बदलाव करने का प्रस्ताव रखा है। यूनियन का कहना है कि कार्य के घंटे कम करके चार दिन का कार्यसप्ताह लागू किया जाए, लेकिन कर्मचारियों के वेतन और अन्य लाभों में कोई कटौती न हो।
ACTU अगले सप्ताह होने वाले इकोनॉमिक रिफॉर्म राउंडटेबल में यह प्रस्ताव पेश करेगी। यूनियन का तर्क है कि तकनीकी प्रगति और बढ़ती उत्पादकता का लाभ केवल कंपनियों और अमीर तबके को नहीं, बल्कि आम कर्मचारियों को भी मिलना चाहिए।
यूनियन ने कहा कि जहां चार दिन का कार्यसप्ताह संभव नहीं है, वहां अतिरिक्त छुट्टियां, वार्षिक अवकाश में बढ़ोतरी और रोस्टर में सुधार जैसे विकल्प अपनाए जा सकते हैं। साथ ही, ओवरटाइम और पेनल्टी रेट जैसी मौजूदा सुविधाएं भी सुरक्षित रहेंगी।
अंतरराष्ट्रीय अनुभव
ACTU ने ब्रिटेन और अन्य देशों के सफल प्रयोगों का हवाला दिया। ब्रिटेन में 2022 में हुए छह माह के ट्रायल में 61 कंपनियों और 2,900 कर्मचारियों ने भाग लिया। नतीजों में पाया गया कि कर्मचारियों में तनाव और बर्नआउट के मामलों में गिरावट आई, नींद और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार हुआ और काम-जीवन संतुलन बेहतर हुआ। लगभग 90% कंपनियों ने इस मॉडल को जारी रखने का निर्णय लिया।
ऑस्ट्रेलिया में भी 100:80:100 मॉडल का परीक्षण हुआ, जिसमें कर्मचारियों ने 80% समय में 100% उत्पादकता के साथ काम करते हुए पूर्ण वेतन प्राप्त किया। इसमें शामिल 10 में से 7 कंपनियों में उत्पादकता बढ़ी।
सरकार का रुख
सामाजिक सेवाएं मंत्री तान्या प्लिबरसेक ने संकेत दिया कि सरकार चार दिन के कार्यसप्ताह के विचार पर विचार करने को तैयार है। प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ ने भी कहा कि उत्पादकता बढ़ाने के लिए व्यावहारिक और सर्वसम्मति वाले कदमों पर चर्चा होनी चाहिए।
व्यापारिक जगत में विरोध की संभावना
हालांकि, व्यापारिक संगठनों के विरोध की आशंका है, क्योंकि इससे कामकाज के तरीकों और लागत संरचना पर असर पड़ सकता है।
ACTU अध्यक्ष मिशेल ओ’नील ने कहा, “उच्च उत्पादकता का लाभ सभी ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों को मिलना चाहिए, न कि केवल कॉर्पोरेट मुनाफे और अधिकारियों के बोनस तक सीमित रहना चाहिए।”