नई दिल्ली। नेशनल हेराल्ड मामले में कांग्रेस नेतृत्व की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की शिकायत के आधार पर एक नई एफआईआर दर्ज की है। इस एफआईआर में कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी समेत कई वरिष्ठ नेताओं के नाम शामिल हैं।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, यह एफआईआर 3 अक्टूबर को दर्ज की गई। आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता की निम्न धाराओं के तहत मामला बनाया गया है—
120B : आपराधिक साज़िश
403 : बेईमानी से संपत्ति का दुरुपयोग
406 : आपराधिक विश्वासघात
420 : धोखाधड़ी
एफआईआर में जिन व्यक्तियों और संस्थाओं के नाम शामिल हैं, वे हैं—
सोनिया गांधी
राहुल गांधी
कांग्रेस नेता सुमन दुबे
सैम पित्रोदा
यंग इंडियन (Young Indian)
डॉटैक्स मर्चेंडाइज लिमिटेड
डॉटैक्स से जुड़े सुनील भंडारी
एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL)
अन्य अज्ञात आरोपी
ईडी ने पीएमएलए की धारा 66(2) के तहत अपने पास उपलब्ध सबूत दिल्ली पुलिस से साझा किए थे, जिसके बाद यह एफआईआर दर्ज हुई।
ईडी द्वारा भेजे गए पत्र और आरोप पत्र में कहा गया है कि कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के नेतृत्व में एक ‘‘संगठित साजिश’’ के तहत यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से एजेएल की लगभग 2000 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों को महज़ 50 लाख रुपये में अधिग्रहित किया गया।
यंग इंडियन कंपनी में सोनिया गांधी और राहुल गांधी 38–38 प्रतिशत हिस्सेदारी वाले प्रमुख शेयरधारक हैं। एजेएल वह कंपनी है जो नेशनल हेराल्ड सहित कई प्रकाशनों का संचालन करती रही है।
ईडी का आरोप है कि इस लेनदेन में सार्वजनिक धन का दुरुपयोग हुआ और कांग्रेस नेताओं ने अपने पद का अनुचित लाभ उठाया।
कांग्रेस बार-बार इस जांच को राजनीतिक बदला करार देती रही है। पार्टी का कहना है कि केंद्र सरकार एजेंसियों का दुरुपयोग कर विपक्ष को निशाना बना रही है।
राउज एवेन्यू कोर्ट ने इस मामले में ईडी की चार्जशीट पर संज्ञान लेने संबंधी फैसला फिलहाल टाल दिया है। विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने अब 16 दिसंबर को आदेश सुनाएंगे।
पहले की सुनवाई में ईडी ने सभी आरोपियों का जवाब मांगा था, लेकिन बचाव पक्ष के कुछ वकीलों ने केस के विस्तृत रिकॉर्ड का हवाला देते हुए अतिरिक्त समय देने की मांग की थी। कोर्ट ने नए आपराधिक कानून बीएनएसएस की धारा 223 के तहत आरोपियों को संज्ञान से पहले सुने जाने का अधिकार भी मान्य किया है।
अब निगाहें 16 दिसंबर पर हैं, जब अदालत यह तय करेगी कि ईडी की चार्जशीट पर संज्ञान लिया जाए या नहीं। फैसला आने के बाद यह हाई-प्रोफाइल मामला एक बार फिर राजनीतिक हलकों में बहस का केंद्र बन सकता है।