सिडनी। न्यू साउथ वेल्स सिविल एंड एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (NCAT) ने मैक्वेरी यूनिवर्सिटी के खिलाफ एक समलैंगिक छात्र द्वारा दायर भेदभाव और उत्पीड़न की शिकायत को खारिज कर दिया है।
छात्र साइमन मारगन ने आरोप लगाया था कि वर्ष 2022 में विश्वविद्यालय ने उन्हें तीन सप्ताह के अनिवार्य प्रशिक्षण के लिए एक कैथोलिक स्कूल भेजा, जबकि वह पहले ही अपनी समलैंगिक पहचान और धार्मिक विद्यालयों के प्रति आपत्ति जता चुके थे। उनका कहना था कि ऐसी जगह पर भेजना उनके लिए "खतरनाक" हो सकता था।
मारगन ने यह भी आरोप लगाया कि स्थानांतरण की मांग करने के बाद विश्वविद्यालय ने उन्हें वहीं बनाए रखा, "फिटनेस टू प्रैक्टिस" प्रक्रिया शुरू की, और शिकायत की जानकारी स्कूल को दे दी जिससे उन्हें अतिरिक्त मानसिक कष्ट हुआ।
ट्रिब्यूनल की कार्यवाहक उपाध्यक्ष और न्यायाधीश नैन्सी हेनसी ने अपने फैसले में कहा कि मारगन द्वारा बताए गए घटनाक्रम "तथ्यात्मक रूप से कमजोर" हैं और भेदभाव के दावे को समर्थन नहीं देते। उन्होंने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय पर ऐसा कोई कानूनी दायित्व नहीं है कि वह छात्र को कैथोलिक स्कूल में भेजने से पहले "हर संभावित खतरे को टाले"।
निर्णय में यह भी उल्लेख किया गया कि शुरुआत में मारगन ने केवल इतना कहा था कि उन्हें ऐसा स्कूल चाहिए जो सार्वजनिक परिवहन से आसानी से पहुँचा जा सके। उन्हें प्लेसमेंट शुरू होने से पाँच दिन पहले ही कैथोलिक स्कूल जाने की सूचना दी गई थी, जिससे उन्हें आपत्ति दर्ज कराने का समय नहीं मिल पाया।
ट्रिब्यूनल ने माना कि विश्वविद्यालय ने उत्पीड़न या भेदभाव के आरोपों की जाँच की थी और कोई सबूत नहीं मिला। हालांकि, यह स्वीकार किया गया कि छात्र को समय पर कोर्स से बिना दंड हटने का मौका नहीं मिला और उन्हें पर्याप्त फीडबैक भी नहीं दिया गया। इस कारण उन्हें बिना पेनल्टी के प्लेसमेंट यूनिट से हटने की अनुमति दी गई।
दोनों शिकायतों को "अपर्याप्त आधार" बताते हुए ट्रिब्यूनल ने सुनवाई की अनुमति देने से इंकार कर दिया।