सुपरमार्केट की ‘श्रिंकफ्लेशन’ पर सरकार का शिकंजा

सुपरमार्केट की ‘श्रिंकफ्लेशन’ पर सरकार का शिकंजा

जल्द ही उपभोक्ताओं को यह जानने का अधिकार मिलेगा कि उनके पसंदीदा प्रोडक्ट की पैकिंग छोटी हुई है लेकिन दाम वही हैं। केंद्र सरकार ने सुपरमार्केट और बड़ी कंपनियों की “श्रिंकफ्लेशन” नीति पर सख्ती दिखाते हुए सोमवार से उपभोक्ताओं और संबंधित पक्षों से परामर्श शुरू करने का ऐलान किया है।

क्या है श्रिंकफ्लेशन?

वित्त मंत्रालय के सहायक मंत्री एंड्रयू लीघ ने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि किसी चॉकलेट बार से दो टुकड़े कम कर दिए जाएं, लेकिन कीमत जस की तस रहे, तो यह श्रिंकफ्लेशन कहलाता है। उन्होंने कहा,
“स्पष्ट जानकारी मिलने पर लोग खुद तय कर पाएंगे कि बदलते पैक साइज पर वही कीमत देना उचित है या नहीं।”

सरकार के प्रस्ताव

सरकार इस पर तीन विकल्पों पर विचार कर रही है –

  1. नोटिफिकेशन सिस्टम: कंपनियों को यह बताना होगा कि पैक छोटा किया गया है।

  2. यूनिट प्राइसिंग को प्रमुख बनाना: यानी प्रति ग्राम/मिलीलीटर कीमत साफ लिखना।

  3. कंपनियों पर जुर्माना: नियम न मानने पर आर्थिक दंड।

एसीसीसी की सिफारिश

ऑस्ट्रेलियाई प्रतिस्पर्धा और उपभोक्ता आयोग (ACCC) ने हाल ही में हुई सुपरमार्केट जांच में कहा था कि यह जानकारी उपभोक्ताओं को दुकानों और वेबसाइट्स पर साफ दिखाई जानी चाहिए। एसीसीसी के उपाध्यक्ष मिक कीओघ ने कहा,
“यह कम से कम की अपेक्षा है। पारदर्शिता मिलने पर उपभोक्ता सही विकल्प चुन सकेंगे और चाहें तो सस्ते विकल्प की ओर जा सकते हैं।”

सुपरमार्केट की बढ़ती कमाई

जांच में पाया गया कि पिछले पाँच वर्षों में ऑस्ट्रेलियाई सुपरमार्केट विश्व के सबसे मुनाफ़ाखोर बन गए हैं और उनका मार्जिन लगातार बढ़ा है। चुनावी वादे के तहत उपभोक्ताओं को राहत दिलाने के लिए सरकार ने एसीसीसी को 30 मिलियन डॉलर से अधिक का फंड भी उपलब्ध कराया है, ताकि ग़लत और भ्रामक गतिविधियों पर नकेल कसी जा सके।