गुप्ता ने ठुकराया 350 मिलियन डॉलर का प्रस्ताव, बंद पड़ी कोयला खदान पर संकट बरकरार

गुप्ता ने ठुकराया 350 मिलियन डॉलर का प्रस्ताव, बंद पड़ी कोयला खदान पर संकट बरकरार

ऑस्ट्रेलिया की प्रमुख कोयला खदान Tahmoor Colliery को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक अहम प्रयास उस समय विफल हो गया, जब खदान के मालिक उद्योगपति Sanjeev Gupta ने 350 मिलियन डॉलर के बचाव प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। यह प्रस्ताव खनन ठेकेदार कंपनी RStar की ओर से दिया गया था।

ताहमूर कोलियरी पिछले कुछ समय से आर्थिक संकट से जूझ रही है और हाल ही में इसके संचालन को बंद कर दिया गया था। खदान बंद होने के कारण सैकड़ों कर्मचारियों की नौकरियां चली गईं, जबकि स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी इसका गहरा असर पड़ा है। इसी पृष्ठभूमि में आर-स्टार ने खदान को फिर से शुरू करने, लंबित देनदारियों को निपटाने और संचालन को स्थिर करने के उद्देश्य से 350 मिलियन डॉलर का प्रस्ताव पेश किया था।

हालांकि, यह मामला विवादों से घिरा हुआ है। खदान के बंद होने से पहले गुप्ता समूह पर ताहमूर कोलियरी से लगभग 427 मिलियन डॉलर निकालने के आरोप लगे हैं। आलोचकों का कहना है कि भारी राशि निकालने के बाद खदान को घाटे में बताकर बंद कर दिया गया, जिससे कर्मचारियों और आपूर्तिकर्ताओं को भारी नुकसान उठाना पड़ा।

आर-स्टार का दावा था कि उसका प्रस्ताव न केवल खदान को दोबारा चालू करने में सक्षम है, बल्कि इससे कर्मचारियों की बहाली, उत्पादन की बहाली और क्षेत्रीय उद्योगों को स्थिरता मिल सकती थी। कंपनी ने इसे “व्यावहारिक और तत्काल समाधान” बताया था।

प्रस्ताव को ठुकराए जाने के बाद गुप्ता की ओर से कोई विस्तृत सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है। इस चुप्पी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर खदान के भविष्य को लेकर उनकी रणनीति क्या है।

उधर, श्रमिक संगठनों और स्थानीय प्रतिनिधियों ने इस फैसले पर गहरी नाराज़गी जताई है। यूनियनों का कहना है कि अगर जल्द कोई समाधान नहीं निकाला गया, तो कर्मचारियों की आजीविका के साथ-साथ पूरे क्षेत्र की आर्थिक संरचना को दीर्घकालिक नुकसान हो सकता है। उन्होंने सरकार से हस्तक्षेप कर स्थिति स्पष्ट करने और वैकल्पिक रास्ता निकालने की मांग की है।

उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि प्रस्ताव ठुकराए जाने के बाद ताहमूर कोलियरी का भविष्य और अधिक अनिश्चित हो गया है। यदि जल्द कोई नया निवेश या पुनर्गठन योजना सामने नहीं आती, तो यह खदान स्थायी रूप से बंद होने की ओर बढ़ सकती है।