दिमागी कैंसर से जूझती पत्नी को छोड़ भागा पति, पति के ‘गंदे’ मैसेज से खुला दर्दनाक तलाक का रुख

दिमागी कैंसर से जूझती पत्नी को छोड़ भागा पति, पति के ‘गंदे’ मैसेज से खुला दर्दनाक तलाक का रुख

सिडनी, 14 जुलाई 2025 – एक दिमागी कैंसर से पीड़ित महिला के साथ उसके पति के बर्बर रवैये ने एक हैरान करने वाला और बेहद दुखद तलाक का रुझान उजागर किया है। उस पति ने पत्नी को छोड़कर उनका सारा संयुक्त बैंक खाता खाली कर दिया और एक दर्दनाक टेक्स्ट मैसेज भेजा, जिससे इस बात की कड़वी सच्चाई सामने आई है कि गंभीर बीमार पत्नी को छोड़ना कुछ पुरुषों का आम रवैया बन गया है।

मैरिए नाम की महिला ने सोशल मीडिया पर अपनी कहानी साझा की, जिसमें उन्होंने बताया कि उनके पति ने छह साल की शादी के बाद उनके दिमागी ट्यूमर की खबर सुनते ही घर छोड़ दिया। उन्होंने लिखा, “मेरी हालत बहुत खराब है, मैंने कई ऑपरेशन और इलाज कराए हैं। मैं हमेशा उसके प्रति वफादार रही, यहाँ तक कि बीमारी के बावजूद उसके लिए खाना बनाती रही, लेकिन उसने मेरा साथ छोड़ दिया।”

मैरिए ने पति का वह टेक्स्ट भी साझा किया, जिसमें उसने लिखा, “यह बहुत कठिन था, तुम्हें मरते हुए देखना सहना मेरे लिए असंभव है। मैंने तुम्हारे इलाज में काफी निवेश किया है, अब मैं अपनी भविष्य के लिए वह पैसा वापस ले रहा हूँ। मैं अब एक नई जिंदगी शुरू करना चाहता हूँ।”

यह दर्दनाक घटना सिर्फ एक दुर्लभ मामला नहीं है, बल्कि एक व्यापक सामाजिक समस्या का हिस्सा है। हाल ही में 27 यूरोपीय देशों में हुए एक अध्ययन में यह पाया गया कि जहां पत्नी गंभीर बीमार होती है, वहां पुरुष तलाक का रास्ता चुनते हैं। वहीं, अगर पति बीमार होता है, तो तलाक की संभावना काफी कम रहती है।

सिडनी विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र प्रोफेसर एलेक्स ब्रूम ने कहा, “हम एक ऐसी समाज में रहते हैं जहां महिलाओं पर घर और परिवार की जिम्मेदारियां ज़्यादा होती हैं, लेकिन जब वे खुद बीमार होती हैं, तब भी पुरुषों की ओर से उन्हें सहारा नहीं मिलता। यह असमानता आज भी बनी हुई है।”

प्रोफेसर ब्रूम ने बताया कि “पुरुषों पर सामाजिक दबाव कम होता है कि वे बीमार पत्नी की देखभाल करें। इसलिए जब चुनौती कठिन होती है तो वे भाग जाते हैं।”

यह शोध इस बात पर भी रोशनी डालता है कि महिलाएं घरेलू काम और देखभाल के कार्यों में पुरुषों की तुलना में बहुत अधिक बोझ उठाती हैं, चाहे वे कामकाजी हों या न हों।

इस मामले ने समाज में महिलाओं के प्रति जिम्मेदारियों और पुरुषों के असहायपन के प्रति एक महत्वपूर्ण बहस छेड़ दी है, खासकर तब जब महिलाएं गंभीर बीमारियों से जूझ रही होती हैं और सबसे अधिक उनकी मदद की जरूरत होती है।0