नई दिल्ली। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस सप्ताह दो दिन की भारत यात्रा पर आ रहे हैं। वैश्विक तनावों, बदलती आर्थिक परिस्थितियों और नई भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच यह दौरा दोनों देशों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उम्मीद है कि व्यापार, रक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, संस्कृति और श्रमिक गतिशीलता जैसे कई अहम क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की जाएगी।
इस यात्रा का सबसे अहम प्रस्तावित समझौता भारतीय कामगारों से जुड़ा मोबिलिटी पैक्ट है। इसके लागू होने के बाद रूस में नौकरी तलाशने वाले भारतीय नागरिकों के लिए वीज़ा और नियुक्ति प्रक्रिया पहले से काफी सरल हो जाएगी।
सूत्रों का कहना है कि समझौते में काम की शर्तें, भर्ती प्रक्रिया, श्रमिक अधिकार और दायित्वों का स्पष्ट उल्लेख होगा।
रूस में निर्माण, स्वास्थ्य सेवा, कृषि और औद्योगिक क्षेत्रों में बड़ी संख्या में श्रमिकों की आवश्यकता है, जिसमें भारत मजबूत साझेदार साबित हो सकता है।
भारत वर्तमान में रूस से हर वर्ष लगभग 65 अरब डॉलर का आयात करता है, जबकि निर्यात मात्र 5 अरब डॉलर के आसपास है। यह भारी व्यापार असंतुलन भारत के लिए चिंता का विषय है।
सरकार चाहती है कि दवाइयों, कृषि उत्पादों, प्रोसेस्ड फूड, टेक्सटाइल और उपभोक्ता वस्तुओं के निर्यात को बढ़ावा दिया जाए। पुतिन की यात्रा के दौरान इन क्षेत्रों में नए अवसर खुलने की उम्मीद है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच बैठक में यूक्रेन संघर्ष का मुद्दा भी उठाया जाएगा। भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि वह युद्ध का समाधान सैन्य कार्रवाई में नहीं, बल्कि “संवाद और कूटनीति” में देखता है।
भारत ने कहा है कि वह केवल उन्हीं शांति पहलों का समर्थन करेगा, जिनका उद्देश्य युद्धविराम और स्थायी शांति बहाली हो।
हाल ही में फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन के राजदूतों ने एक भारतीय अख़बार में संयुक्त लेख लिखकर रूस के राष्ट्रपति पुतिन की आलोचना की थी और उन्हें शांति प्रयासों में बाधक बताया था।
भारत ने इस लेख पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे “असामान्य और अनुचित राजनयिक व्यवहार” बताया। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, यह टिप्पणी भारत-रूस संबंधों को प्रभावित करने की नीयत से की गई थी।
भारत और रूस उर्वरक क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने पर भी सहमत हो सकते हैं। रूस हर साल भारत को तीन से चार मिलियन टन उर्वरक निर्यात करता है, जो कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है।
साथ ही यूरेशियन आर्थिक संघ (EAEU) के साथ प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को अंतिम रूप देने पर भी अहम चर्चा होने की संभावना है।
ऊर्जा क्षेत्र में, पिछले कुछ महीनों में रूस से कच्चे तेल के आयात में कमी दर्ज की गई है। अधिकारियों का कहना है कि यह गिरावट बाजार परिस्थितियों, वैश्विक तेल कीमतों और अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण स्वाभाविक है।