पेरिस।
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा है कि मौजूदा वैश्विक अस्थिरता के दौर में भारत और यूरोप की साझेदारी अंतरराष्ट्रीय राजनीति और अर्थव्यवस्था को स्थिरता प्रदान कर सकती है। फ्रांस की राजधानी पेरिस में फ्रांसीसी विदेश मंत्री के साथ द्विपक्षीय वार्ता के बाद उन्होंने यह बात कही।
फ्रांस दौरे पर पहुंचे जयशंकर ने बुधवार को अपने फ्रांसीसी समकक्ष जीन‑नोएल बैरट से मुलाकात की। बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि यूरोप वैश्विक स्तर पर एक अहम शक्ति है और भारत के लिए उसके साथ रिश्तों को और मजबूत करना रणनीतिक रूप से जरूरी है।
विदेश मंत्री ने कहा कि जिस समय दुनिया कई तरह की राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियों से गुजर रही है, ऐसे में भारत-यूरोप सहयोग की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने कहा कि भारत का यह विश्वास है कि यूरोप के साथ संबंध अब अगले स्तर तक ले जाने के लिए तैयार हैं।
जयशंकर ने बताया कि हाल के हफ्तों में भारत और यूरोप के बीच मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए), प्रौद्योगिकी, सेमीकंडक्टर, रेलवे, रक्षा और विमानन जैसे अहम क्षेत्रों पर व्यापक चर्चा हुई है। उन्होंने कहा कि दोनों के बीच पहले से ही मजबूत आधार मौजूद है, लेकिन सहयोग की संभावनाएं इससे कहीं अधिक हैं।
विदेश मंत्री ने कहा कि आज दुनिया के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि वैश्विक व्यवस्था कैसी होनी चाहिए, उसके नियम क्या हों और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को किस दिशा में आगे बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि इन विषयों पर भारत और यूरोप को मिलकर गंभीर संवाद करना होगा, क्योंकि यूरोप वैश्विक राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाता है।
जयशंकर ने जानकारी दी कि आने वाले कुछ हफ्तों में भारत कई प्रमुख यूरोपीय नेताओं की मेजबानी करेगा। इनमें जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मेर्ज, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और यूरोपीय संघ के शीर्ष नेता शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि वैश्विक राजनीति में स्थिरता लाने के लिए भारत और फ्रांस का मिलकर काम करना समय की आवश्यकता बन गया है। जयशंकर ने फ्रांस को भारत के सबसे पुराने रणनीतिक साझेदारों में से एक बताते हुए कहा कि निरंतर संवाद और सहयोग से यह संबंध और मजबूत होंगे।