नई दिल्ली, 20 जून 2025
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने देशवासियों को एक बड़ी उपलब्धि की झलक दी है। उन्होंने बताया कि भारत हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक में निर्णायक कदम बढ़ा चुका है, और अगले दो से तीन वर्षों में इसकी अंतिम परीक्षण प्रक्रिया पूरी कर इसे सेना के बेड़े में शामिल कर लिया जाएगा।
डॉ. कामत ने कहा, "भारत अब आत्मनिर्भर रक्षा क्षमताओं की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। हाइपरसोनिक मिसाइल टेक्नोलॉजी में शुरुआती सफलताएं मिल चुकी हैं, और हम अब फाइनल फेज़ की ओर बढ़ रहे हैं।"
हाइपरसोनिक मिसाइल वह हथियार है जो ध्वनि की गति से पांच गुना तेज (Mach 5 या लगभग 6000 किमी/घंटा) रफ्तार से उड़ान भरता है। इसकी रेंज 2000 किलोमीटर से अधिक हो सकती है और यह क्रूज़ मिसाइल की तरह बेहद कम ऊंचाई पर उड़ान भरती है, जिससे इसे ट्रैक करना लगभग असंभव हो जाता है।
यह मिसाइल अपने रास्ते में बदलाव भी कर सकती है, जिससे दुश्मन की सतह से हवा में मार करने वाली प्रणालियां भी इसके आगे बेअसर हो जाती हैं। इस मिसाइल के निशाने पर मौजूद दुश्मन को प्रतिक्रिया का समय ही नहीं मिलेगा।
डॉ. कामत ने बताया कि यह मिसाइल DRDO के हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डेमॉन्स्ट्रेटर व्हीकल (HSTDV) पर आधारित है, जिसका पहला सफल परीक्षण वर्ष 2020 में किया गया था। इसके बाद नवंबर 2024 में ओडिशा तट से लंबी दूरी की हाइपरसोनिक मिसाइल का परीक्षण भी सफलतापूर्वक पूरा किया गया।
इस परियोजना के तहत हाल ही में भारत में 1000 सेकंड तक स्वदेशी स्क्रैमजेट इंजन का सफल परीक्षण किया गया है, जो हवा से ऑक्सीजन लेकर ईंधन जलाता है। यह तकनीक पूरी तरह से ‘मेड इन इंडिया’ है और विश्व के चुनिंदा देशों के पास ही यह क्षमता है।
दुनिया में अमेरिका, रूस और चीन जैसे गिने-चुने देशों के पास ही हाइपरसोनिक हथियार मौजूद हैं। भारत का इसमें प्रवेश वैश्विक सामरिक संतुलन को नई दिशा देगा। पाकिस्तान और चीन जैसे पड़ोसी देशों की निगाहें अब भारत की इस नई तकनीकी प्रगति पर टिक गई हैं।
यदि यह मिसाइल सेना में शामिल हो जाती है तो भारत की मारक क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी और दुश्मन देश के लिए यह एक गंभीर चेतावनी साबित होगी।