नई दिल्ली। भारत और जर्मनी के बीच द्विपक्षीय संबंध अभूतपूर्व मजबूती के दौर से गुजर रहे हैं। भारत में जर्मनी के राजदूत फिलिप एकरमैन ने कहा है कि दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी अब तक के सर्वोच्च स्तर पर पहुंच चुकी है और आने वाले वर्षों में रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग इसका केंद्रीय आधार होगा।
मीडिया से बातचीत में जर्मन राजदूत ने भारत को जर्मनी का एक प्रमुख रणनीतिक साझेदार बताते हुए कहा कि बीते कुछ वर्षों में रक्षा क्षेत्र में सहयोग उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है। उन्होंने भारतीय सशस्त्र बलों के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यासों, तकनीकी सहयोग और सुरक्षा संवादों में तेजी का उल्लेख किया।
एकरमैन ने कहा कि भारत और जर्मनी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, नियम आधारित वैश्विक प्रणाली और लोकतांत्रिक मूल्यों को लेकर समान दृष्टिकोण साझा करते हैं। इसी कारण रक्षा और सुरक्षा ऐसा क्षेत्र बनकर उभर रहा है, जहां दोनों देशों के बीच अधिक व्यापक और बहुआयामी साझेदारी विकसित होगी।
उन्होंने बताया कि जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की 12 और 13 जनवरी को प्रस्तावित भारत यात्रा से द्विपक्षीय संबंधों को नई गति मिलेगी। यह दौरा रणनीतिक सहयोग, रक्षा साझेदारी और भविष्य की संयुक्त पहलों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण साबित होगा।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले जर्मन राजदूत ने नई दिल्ली में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह से मुलाकात कर रक्षा सहयोग से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की थी। दोनों पक्षों ने आपसी सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
भारत और जर्मनी के बीच बढ़ता रक्षा सहयोग न केवल द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई देगा, बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।