भारत–ईरान के रिश्ते 3000 साल पुराने, चाबहार परियोजना बिना रुकावट आगे बढ़ेगी: ईरानी प्रतिनिधि

भारत–ईरान के रिश्ते 3000 साल पुराने, चाबहार परियोजना बिना रुकावट आगे बढ़ेगी: ईरानी प्रतिनिधि

ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने भारत–ईरान संबंधों को ऐतिहासिक, मजबूत और बहुआयामी बताते हुए कहा है कि दोनों देशों के रिश्ते किसी हालिया राजनीतिक समीकरण पर नहीं, बल्कि लगभग 3000 साल पुरानी सभ्यतागत और सांस्कृतिक साझेदारी पर आधारित हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि चाबहार बंदरगाह परियोजना पर काम आगे भी अच्छे ढंग से चलता रहेगा।

समाचार एजेंसी एएनआई को दिए साक्षात्कार में इलाही ने कहा कि भारत और ईरान के बीच संपर्क इस्लाम के उदय से भी पहले का है। उन्होंने बताया कि ईरान में लंबे समय से भारतीय दर्शन, गणित, खगोल विज्ञान और चिकित्सा से जुड़ी पुस्तकों का अध्ययन होता रहा है और विश्वविद्यालयों में भारतीय ज्ञान परंपरा का गहरा प्रभाव देखने को मिलता है। इससे स्पष्ट होता है कि दोनों देशों के रिश्ते केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और बौद्धिक भी हैं।

चाबहार पर भारत के साथ सहयोग जारी रहेगा

चाबहार बंदरगाह परियोजना को लेकर इलाही ने कहा कि ईरान का नेतृत्व हमेशा भारत के साथ अच्छे संबंधों का समर्थक रहा है। उन्होंने कहा कि भारत ने अब तक किसी तीसरे देश के दबाव में आकर ईरान से अपने रिश्ते कमजोर नहीं किए हैं और दोनों देश आपसी सहयोग को आगे बढ़ाना चाहते हैं।

चाबहार बंदरगाह भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम है, क्योंकि इसके जरिए भारत अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पाकिस्तान पर निर्भर हुए बिना व्यापार कर सकता है। यह परियोजना इंटरनेशनल नॉर्थ–साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। भारत ने वर्ष 2003 में इस परियोजना का प्रस्ताव रखा था, जिसके बाद भारतीय कंपनी इंडियन पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड और ईरान की पोर्ट एंड मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन के बीच दीर्घकालिक समझौता हुआ।

हालांकि, अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण परियोजना की गति पहले धीमी पड़ी थी। वर्तमान में अमेरिका ने चाबहार परियोजना को लेकर सशर्त प्रतिबंध छूट दे रखी है, जो 26 अप्रैल 2026 तक वैध है। भारत सरकार इस छूट को आगे भी जारी रखने के लिए अमेरिका से लगातार बातचीत कर रही है।

द्विपक्षीय व्यापार 1.6 अरब डॉलर

भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत–ईरान के बीच मौजूदा द्विपक्षीय व्यापार करीब 1.6 अरब डॉलर का है। इसमें भारत का ईरान को निर्यात लगभग 1.2 अरब डॉलर, जबकि ईरान से आयात करीब 0.4 अरब डॉलर है। भारत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस घोषणा पर भी नजर रखे हुए है, जिसमें ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की बात कही गई है।

ईरान में हालात नियंत्रण में: इलाही

ईरान की आंतरिक स्थिति पर बोलते हुए इलाही ने कहा कि प्रतिबंधों के कारण देश में आर्थिक चुनौतियां जरूर हैं और इससे कुछ असंतोष भी है, लेकिन सोशल मीडिया और विदेशी मीडिया में दिखाई जा रही तस्वीरें पूरी तरह वास्तविक नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि वास्तविक हालात और मीडिया में दिखाई जा रही स्थिति के बीच बड़ा अंतर है और फिलहाल ईरान में स्थिति नियंत्रण में है।

प्रदर्शनों और हिंसा को लेकर उन्होंने कहा कि कुछ मौतें हुई हैं, लेकिन उनके आंकड़ों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई विदेशी संगठन और मीडिया संस्थान सरकार की छवि खराब करने के लिए तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करते हैं।