ईरान का अमेरिका को खुला अल्टीमेटम, कहा—हमले की सूरत में अमेरिकी ठिकाने और इज़रायल होंगे निशाने पर

ईरान का अमेरिका को खुला अल्टीमेटम, कहा—हमले की सूरत में अमेरिकी ठिकाने और इज़रायल होंगे निशाने पर

तेहरान। ईरान में जारी व्यापक विरोध-प्रदर्शनों के बीच देश के शीर्ष नेतृत्व ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर क़ालिबाफ ने साफ शब्दों में कहा है कि यदि ईरान पर किसी भी तरह का हमला किया गया, तो अमेरिका के सैन्य अड्डे, युद्धपोत और इज़रायल ईरान के “वैध निशाने” होंगे।

ईरानी संसद में दिए गए इस बयान के दौरान माहौल बेहद उग्र रहा। सांसदों ने मंच को घेरते हुए अमेरिका के खिलाफ नारेबाज़ी की। क़ालिबाफ ने कहा कि ईरान किसी भी दबाव या आक्रमण के सामने झुकने वाला नहीं है और अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा।

दो सप्ताह से जारी विरोध-प्रदर्शन

गौरतलब है कि ईरान में बीते लगभग दो हफ्तों से आर्थिक संकट, महंगाई और बेरोज़गारी के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। कई शहरों में प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर उतरकर सरकार और सर्वोच्च नेतृत्व के खिलाफ नाराज़गी जताई है। हालात को काबू में रखने के लिए सरकार ने इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी हैं और संचार व्यवस्था पर सख्त नियंत्रण लगाया गया है।

मौतों का आंकड़ा बढ़ने की आशंका

अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों के अनुसार, विरोध प्रदर्शनों में अब तक कम से कम 200 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि मानवाधिकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का दावा है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं ज़्यादा हो सकती है।

राष्ट्रपति का आरोप—विदेशी साज़िश

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने भी हालात पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और इज़रायल ईरान में अशांति फैलाने के लिए “दंगाइयों और आतंकवादी तत्वों” का इस्तेमाल कर रहे हैं। राष्ट्रपति ने जनता से अपील की कि वे हिंसा और अव्यवस्था फैलाने वालों से दूरी बनाए रखें।

राष्ट्रपति ने यह भी भरोसा दिलाया कि सरकार जनता की आर्थिक मांगों और समस्याओं पर गंभीरता से विचार करेगी, लेकिन देश की सुरक्षा और स्थिरता से किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।

बढ़ता तनाव, दुनिया की निगाहें ईरान पर

ईरान के इस आक्रामक रुख और अंदरूनी हालात ने पश्चिम एशिया में तनाव को और गहरा कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय पूरे घटनाक्रम पर नज़र बनाए हुए है, क्योंकि हालात बिगड़ने की स्थिति में इसका असर क्षेत्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी पड़ सकता है।