मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच एक नई चिंता सामने आई है—पानी की आपूर्ति पर संभावित खतरा। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ईरान और क्षेत्रीय संघर्ष के चलते जल संरचना (वॉटर इंफ्रास्ट्रक्चर) को निशाना बनाया गया, तो सऊदी अरब जैसे देश महज 7 दिनों में गंभीर जल संकट का सामना कर सकते हैं।
दरअसल, फारस की खाड़ी (Persian Gulf) क्षेत्र में पीने के पानी की बड़ी मात्रा समुद्र के पानी को शुद्ध करने वाली डिसेलिनेशन (नमकीन पानी को मीठा बनाने वाली) इकाइयों से आती है। पूरे क्षेत्र में ऐसी लगभग 450 से अधिक प्लांट्स सक्रिय हैं, जिन पर लाखों लोगों की रोजमर्रा की जरूरतें निर्भर हैं।
अब तक क्षेत्र में ऊर्जा आपूर्ति (तेल और गैस) पर हमलों की आशंका को लेकर ज्यादा चर्चा होती रही है, लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर जल संयंत्रों को निशाना बनाया गया, तो उसका असर कहीं ज्यादा गंभीर और तात्कालिक होगा। सऊदी अरब की अधिकांश शहरी आबादी इन संयंत्रों पर निर्भर है, और किसी बड़े हमले की स्थिति में देश के पास सीमित जल भंडारण ही उपलब्ध है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यदि प्रमुख डिसेलिनेशन प्लांट्स बंद हो जाते हैं या क्षतिग्रस्त होते हैं, तो सिर्फ एक सप्ताह के भीतर ही पीने के पानी की भारी कमी हो सकती है। इससे न सिर्फ आम जनजीवन प्रभावित होगा, बल्कि अस्पतालों, उद्योगों और कृषि क्षेत्र पर भी गहरा असर पड़ेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह संकट केवल सऊदी अरब तक सीमित नहीं रहेगा। संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और कतर जैसे अन्य खाड़ी देश भी इसी तरह के सिस्टम पर निर्भर हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में मानवीय संकट (Humanitarian Crisis) की स्थिति बन सकती है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी इस खतरे को लेकर सतर्क हो गया है। कई विश्लेषकों का कहना है कि अगर जल संरचना पर हमले शुरू होते हैं, तो यह संघर्ष का एक नया और खतरनाक चरण होगा, जिसे “वॉटर वॉर (Water War)” कहा जा सकता है।
फिलहाल, क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और संवेदनशील संयंत्रों की निगरानी की जा रही है। हालांकि, तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों की भी जरूरत बताई जा रही है, ताकि संभावित संकट को टाला जा सके।