जेएनयू नारेबाजी विवाद: वाइस चांसलर बोलीं—कुछ अराजक तत्व पूरे विश्वविद्यालय की पहचान नहीं

जेएनयू नारेबाजी विवाद: वाइस चांसलर बोलीं—कुछ अराजक तत्व पूरे विश्वविद्यालय की पहचान नहीं

नई दिल्ली।
Jawaharlal Nehru University (जेएनयू) परिसर में प्रधानमंत्री Narendra Modi और केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah के खिलाफ कथित नारेबाजी को लेकर उठे विवाद पर विश्वविद्यालय की वाइस चांसलर Shantishree Dhulipudi Pandit का बयान सामने आया है। उन्होंने घटना की निंदा करते हुए कहा कि कुछ अराजक या “पागल” तत्व पूरे विश्वविद्यालय को परिभाषित नहीं कर सकते।

जेएनयू परिसर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान वाइस चांसलर ने कहा कि हर विश्वविद्यालय में कुछ ऐसे लोग होते हैं, लेकिन उनका आचरण संस्थान के मूल्यों और पहचान को नहीं दर्शाता। उन्होंने कहा कि जेएनयू देश का एक अत्यंत राष्ट्रवादी विश्वविद्यालय है और यहां से सेना, वायुसेना, नौसेना, आईएमए और डीआरडी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के अधिकारी निकल चुके हैं।

उन्होंने विश्वविद्यालय की समावेशी प्रकृति पर जोर देते हुए कहा कि जेएनयू में देश के गरीब और वंचित वर्गों के छात्र कम शुल्क पर शिक्षा प्राप्त करते हैं और यहां किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाता। वाइस चांसलर के अनुसार, नारेबाजी की घटना के 24 घंटे के भीतर ही परिसर में स्थिति सामान्य हो गई थी और शांति बनी हुई थी।

नारेबाजी की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि सोमवार को Supreme Court of India ने 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े मामलों में आरोपी Umar Khalid और Sharjeel Imam की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं। इसके बाद सोमवार रात को जेएनयू परिसर में छात्रों के एक समूह द्वारा प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के खिलाफ कथित रूप से आपत्तिजनक नारे लगाए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ।

पुलिस कार्रवाई

विश्वविद्यालय प्रशासन की शिकायत पर Delhi Police ने मामले में एफआईआर दर्ज की है। पुलिस के अनुसार, यह मामला भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 352 (शांति भंग करने) और 353(1) सहित अन्य धाराओं के तहत दर्ज किया गया है। जेएनयू प्रशासन ने नारों को अत्यधिक आपत्तिजनक, उत्तेजक और भड़काऊ बताते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग की थी।