कैथलीन फोलबिग को गलत सजा के लिए न्यू साउथ वेल्स सरकार से 20 साल बाद 2 मिलियन डॉलर का मुआवजा, वकील बोले– ‘अन्यायपूर्ण और अपमानजनक’

कैथलीन फोलबिग को गलत सजा के लिए न्यू साउथ वेल्स सरकार से 20 साल बाद 2 मिलियन डॉलर का मुआवजा, वकील बोले– ‘अन्यायपूर्ण और अपमानजनक’

सिडनी – ऑस्ट्रेलिया की सबसे चौंकाने वाली न्यायिक भूलों में से एक के पीड़ित, कैथलीन फोलबिग को आखिरकार न्यू साउथ वेल्स (NSW) सरकार द्वारा 20 वर्षों की गलत सजा के बाद 2 मिलियन ऑस्ट्रेलियन डॉलर का मुआवजा दिया जाएगा। हालांकि यह फैसला अब एक नई बहस का कारण बन गया है, क्योंकि इस राशि को उनकी पीड़ा और नुकसान के मुकाबले "अत्यंत अन्यायपूर्ण और नैतिक रूप से अस्वीकार्य" बताया जा रहा है।

फोलबिग को 2003 में अपने चार बच्चों — केलिब, पैट्रिक, सारा और लॉरा — की हत्या के आरोप में दोषी ठहराया गया था। बच्चों की मौत 1989 से 1999 के बीच हुई थी, जब उनकी उम्र महज 19 दिन से 18 महीने के बीच थी। वैज्ञानिक साक्ष्यों और आनुवंशिक परीक्षणों के आधार पर यह सामने आया कि बच्चों की मौत प्राकृतिक कारणों या जेनेटिक म्यूटेशन से हो सकती है। 2023 में उन्हें निर्दोष करार दिया गया और पिछले साल जून में जेल से रिहा कर दिया गया।

NSW के अटॉर्नी जनरल माइकल डेली ने फोलबिग को यह राशि एक्स-ग्रेशिया (अनुग्रह आधारित) भुगतान के रूप में देने की घोषणा की। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस निर्णय के विवरण को सार्वजनिक नहीं किया जाएगा।

वकील और समर्थकों की तीखी प्रतिक्रिया

कैथलीन की वकील रानी रेगो ने इस राशि को “गंभीर अन्याय” बताया। उन्होंने कहा, “फोलबिग ने न केवल अपने चार बच्चों को खोया, बल्कि जिंदगी के 20 कीमती साल भी जेल में बिता दिए। अब सरकार द्वारा दिया गया यह मुआवजा एक नैतिक अपमान है।”

रेगो ने यह भी याद दिलाया कि 1994 में लिंडी चेम्बरलेन को सिर्फ 3 साल जेल में रहने पर 1.7 मिलियन डॉलर का मुआवजा मिला था, तो फिर फोलबिग को 20 साल बाद केवल 2 मिलियन क्यों?

राजनीतिक प्रतिक्रिया

ग्रीन्स पार्टी की सांसद और न्याय प्रवक्ता सू हिगिंसन ने इस राशि को “अपमानजनक और शर्मनाक” बताया। उन्होंने कहा, “यह राशि एक तरह से उन्हें चुप कराने की कोशिश है, यह कोई इंसाफ नहीं है। ये मुआवजा न उनके खोए हुए वेतन की भरपाई करता है, न उनके बच्चों, घर, करियर, या मानसिक पीड़ा की।”

अब भी कैद की छाया में जी रही हैं फोलबिग

रिहाई के बाद दिए एक साक्षात्कार में फोलबिग ने बताया कि वह अब भी मानसिक रूप से जेल के प्रभाव से उबर नहीं पाई हैं। “मैं दरवाजे नहीं खोल पाती, हमेशा डर लगा रहता है कि कोई पीछे से आ जाएगा। 20 साल तक मैंने कोई दरवाजा नहीं खोला, वह आदत अब भी छूटी नहीं।”

न्याय की लड़ाई अभी बाकी

जहां सरकार का कहना है कि वह इस मुद्दे पर आगे कोई टिप्पणी नहीं करेगी, वहीं कैथलीन के समर्थक चाहते हैं कि इस मामले में पूरी पारदर्शिता हो और यह भी जांच हो कि आखिर इतनी कम मुआवजा राशि कैसे तय हुई।

कैथलीन फोलबिग की कहानी अब एक चेतावनी बन गई है — कि कैसे वैज्ञानिक समझ की कमी और संस्थागत लापरवाही, एक मासूम महिला को जीवनभर के लिए कैद कर सकती है। लेकिन उनका संघर्ष इस बात की भी मिसाल है कि सच्चाई चाहे जितनी देर से सामने आए, उसका महत्व कभी खत्म नहीं होता।