मेलबर्न, 5 अगस्त:
ऑस्ट्रेलिया की सबसे लोकप्रिय डिपार्टमेंटल स्टोर चेन केमार्ट अब एक कानूनी विवाद में घिर गई है। कंपनी पर आरोप है कि वह चीन के शिनजियांग क्षेत्र में कथित रूप से जबरन श्रम शिविरों से जुड़े कारखानों से माल मंगवाती रही है। इस मामले में केमार्ट को ऑस्ट्रेलियाई संघीय न्यायालय से नोटिस जारी हुआ है, जिसमें उससे यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि क्या उसने इन आपूर्तिकर्ताओं की जांच की है या नहीं।
मानवाधिकार संगठनों और उपभोक्ता संरक्षण समूहों की ओर से यह याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि केमार्ट के सप्लाई चेन में ऐसे कारखाने शामिल हो सकते हैं जो उइगर मुसलमानों को जबरन श्रम करवाते हैं।
याचिका के अनुसार, शिनजियांग क्षेत्र में चीनी सरकार की नीतियों के तहत लाखों उइगर मुसलमानों को नजरबंद शिविरों में रखा गया है और उन्हें फैक्ट्रियों में मुफ्त या बेहद कम मेहनताना देकर काम करने पर मजबूर किया गया है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पहले भी इस मुद्दे पर चीन की आलोचना होती रही है।
अदालत ने केमार्ट से कहा है कि वह अपने आपूर्तिकर्ताओं और उत्पादन प्रक्रिया से जुड़ी पारदर्शिता दिखाए, और यह प्रमाणित करे कि उसने मानवाधिकार उल्लंघनों से बचने के लिए कोई ठोस कदम उठाए हैं या नहीं।
केमार्ट ने अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। हालांकि कंपनी पूर्व में कह चुकी है कि वह अपने सप्लाई चेन में नैतिक व्यापार नीति का पालन करती है और किसी भी तरह की जबरन श्रम प्रथा का समर्थन नहीं करती।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब दुनिया भर की बड़ी कंपनियां अपने आपूर्तिकर्ताओं के श्रम मानकों और नैतिक व्यापार व्यवहार को लेकर लगातार जांच के दायरे में आ रही हैं।
मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि यदि केमार्ट की सप्लाई चेन में जबरन श्रम के प्रमाण मिलते हैं, तो यह उपभोक्ताओं के साथ विश्वासघात और नैतिक व्यापार के मूल्यों का उल्लंघन होगा।
इस मामले की अगली सुनवाई आगामी सप्ताह निर्धारित की गई है।