कैनबरा।
ऑस्ट्रेलिया की लेबर सरकार द्वारा लागू किए गए श्रम कानूनों को लेकर पिछले साल जब से घोषणा हुई थी, तब से लेकर अब तक उद्योग जगत में काफी हलचल रही। कई बड़े व्यापारिक संगठनों और उद्योगपतियों ने आशंका जताई थी कि इन बदलावों से कारोबार डगमगा जाएगा और रोजगार पर संकट खड़ा हो जाएगा।
लेकिन, श्रम मंत्री अमांडा रिशवर्थ का कहना है कि इन सभी आशंकाओं के बावजूद हालात बिल्कुल सामान्य हैं और “आसमान नहीं टूटा।” उन्होंने साफ कहा कि लेबर सरकार ने जो वादे किए थे, उन्हें निभाने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं और आज इसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।
व्यापार जगत का तर्क है कि नई नीतियों से कंपनियों पर बोझ बढ़ा है, कामकाज की लचीलापन घटा है और कई छोटे व्यवसायों के लिए प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो गया है। यही वजह है कि सुधारों की पहली वर्षगांठ पर भी उद्योग जगत के कई नेता नाराज़गी जता रहे हैं।
सरकार का कहना है कि इन सुधारों का मकसद कर्मचारियों को सुरक्षा और अधिकार देना है। रिशवर्थ ने कहा कि लंबे समय से कर्मचारियों को अनुचित अनुबंधों और असुरक्षित नौकरी की स्थिति से जूझना पड़ रहा था। लेबर सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि कर्मचारियों को उचित वेतन, सुरक्षित कार्यस्थल और स्थायी नौकरी की गारंटी मिले।
मंत्री ने कहा कि पिछले एक साल के अनुभव ने साबित कर दिया है कि उद्योग जगत की ओर से जताई गई “भयावह भविष्यवाणी” सच नहीं हुई। अर्थव्यवस्था सामान्य ढंग से चल रही है, रोजगार प्रभावित नहीं हुआ और श्रमिकों को राहत मिली है।
लेबर सरकार मानती है कि उसकी नीतियां व्यवसाय और कर्मचारियों दोनों के हित में हैं, जबकि उद्योग जगत अभी भी इनसे पूरी तरह संतुष्ट नहीं है। लेकिन एक साल के अनुभव ने यह ज़रूर साबित कर दिया है कि लेबर की श्रम नीतियाँ किसी संकट की वजह नहीं बनीं, बल्कि श्रमिकों के लिए नए अधिकारों की राह खोली है।