भारतीय प्रवासियों पर बयान से मचा तूफ़ान, लिबरल पार्टी में गहराया संकट

भारतीय प्रवासियों पर बयान से मचा तूफ़ान, लिबरल पार्टी में गहराया संकट

कैनबरा, प्रतिनिधि – ऑस्ट्रेलिया की राजनीति में इन दिनों भारतीय प्रवासियों पर दिए गए बयान को लेकर जबरदस्त हलचल मची हुई है। लिबरल पार्टी की नॉर्दर्न टेरिटरी की सीनेटर जसिंटा नामपिंजिम्पा प्राइस ने हाल ही में एक टीवी इंटरव्यू में आरोप लगाया था कि "लेबर सरकार जानबूझकर बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासियों को देश ला रही है क्योंकि वे लेबर पार्टी को वोट देते हैं।"

यह बयान आते ही राजनीतिक तूफ़ान खड़ा हो गया। खासकर भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय, जो देश के सबसे बड़े और सबसे तेजी से बढ़ते प्रवासी समूहों में शामिल है, उसमें नाराज़गी देखी जा रही है।

पार्टी के वरिष्ठ नेता और विपक्ष के बिज़नेस मैनेजर एलेक्स हॉक ने प्राइस को सलाह दी कि वे तुरंत माफी माँगकर मामला शांत करें। उनका कहना है कि प्राइस का इरादा भले ही नस्लभेदी न रहा हो, लेकिन बयान का असर वैसा ही हुआ है।

हॉक ने कहा –
"मैंने खुद जसिंटा को फ़ोन कर कहा कि यह बयान समस्या खड़ी कर सकता है। माफी मांग लेने से यह विवाद यहीं थम जाएगा।"

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनके अनुसार यह बयान गलत समय पर आया, क्योंकि ठीक उसी हफ्ते देश में एंटी-इमिग्रेशन रैलियाँ हुई थीं, जिनमें खासतौर पर भारतीयों को निशाना बनाया गया।


सोशल मीडिया पर गरमाई जंग

लेकिन जसिंटा प्राइस झुकने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि एलेक्स हॉक ने उनके एक स्टाफ सदस्य के साथ "कायराना और अनुचित" व्यवहार किया।

प्राइस ने लिखा –
"लिबरल पार्टी की असली महिला समस्या यही है कि जब पार्टी के भीतर ही किसी महिला सहयोगी के साथ बुरा बर्ताव होता है, तो कोई खड़ा नहीं होता।"

हॉक ने इन आरोपों को सिरे से नकारते हुए कहा कि यह बात लिंग या महिला मुद्दे से जुड़ी नहीं है। उन्होंने दावा किया कि उनका और प्राइस के स्टाफ के बीच सिर्फ एक-दो मिनट की सामान्य बातचीत हुई थी।


विपक्षी नेता सुसान लेय की चुनौतियाँ

इस विवाद ने पार्टी की डिप्टी लीडर और विपक्ष की नेता सुसान लेय के लिए बड़ी परेशानी खड़ी कर दी है। उन्होंने तुरंत ‘डैमेज कंट्रोल’ शुरू किया और भारतीय एवं चीनी समुदायों के साथ संवाद बैठकों का आयोजन किया। साथ ही, उन्होंने मेलबर्न के ‘लिटिल इंडिया’ क्षेत्र का दौरा भी किया।

हालाँकि, उन्होंने खुद माफी मांगने से इनकार कर दिया। लेय ने प्राइस के बयान को “गलत” बताया और भरोसा दिलाया कि इस तरह की गलती दोबारा नहीं होगी।


अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया

  • जेन ह्यूम – प्राइस ने अपने बयान में अप्रत्यक्ष रूप से विक्टोरिया की सीनेटर जेन ह्यूम का भी जिक्र किया, जिन्होंने चुनाव अभियान के दौरान चीनी समुदाय पर एक विवादास्पद टिप्पणी की थी। ह्यूम ने प्रतिक्रिया में कहा कि उन्हें यह देखकर झटका लगा कि उनका नाम इस बहस में घसीटा गया।

  • बर्नबी जॉयस (नेशनल पार्टी) – उन्होंने स्पष्ट कहा कि प्राइस को अब माफी मांग लेनी चाहिए और इस विवाद का अंत करना चाहिए।


पार्टी के भीतर चिंता

लिबरल पार्टी के कई सांसद मानते हैं कि प्राइस के बयान ने वर्षों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। पार्टी ने लंबे समय से भारतीय समुदाय में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश की थी, लेकिन यह बयान उस विश्वास को हिला सकता है।

एक सांसद ने इसे “सिर पकड़ लेने वाला क्षण” बताया। वहीं, यह विवाद NSW की गुटबाज़ी को भी उजागर करता है, जहाँ एंगस टेलर और एलेक्स हॉक अलग-अलग धड़ों का नेतृत्व करते हैं।