मध्यप्रदेश की ‘टाइगर स्टेट’ छवि पर सवाल: पांच साल में 147 बाघों की मौत, 87 आपसी संघर्ष में मारे गए

मध्यप्रदेश की ‘टाइगर स्टेट’ छवि पर सवाल: पांच साल में 147 बाघों की मौत, 87 आपसी संघर्ष में मारे गए

भोपाल। देश में सर्वाधिक बाघों की मौजूदगी के कारण मध्यप्रदेश को ‘टाइगर स्टेट’ के रूप में पहचान मिली है, लेकिन हाल के आंकड़ों ने इस छवि पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राज्य सरकार ने विधानसभा में स्वीकार किया है कि पिछले पांच वर्षों में प्रदेश में कुल 147 बाघों की मौत हुई है। इनमें शावक भी शामिल हैं।

कांग्रेस विधायक लखन घनघोरिया के प्रश्न के लिखित उत्तर में सरकार ने बताया कि इन 147 मौतों में से 87 बाघ आपसी संघर्ष (टेरिटोरियल फाइट) में मारे गए। वहीं 16 बाघों की मौत करंट लगने और शिकार (पोचिंग) के कारण हुई। शेष मामलों में प्राकृतिक कारण, बीमारी या अन्य परिस्थितियां शामिल बताई गई हैं।

बाघों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि

सरकार के अनुसार वर्ष 2018 की गणना में प्रदेश में 526 बाघ थे, जबकि वर्ष 2022 की अखिल भारतीय बाघ गणना में यह संख्या बढ़कर 785 हो गई। इस प्रकार चार वर्षों में लगभग 49 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

विशेषज्ञों का मानना है कि बाघों की बढ़ती संख्या संरक्षण प्रयासों की सफलता दर्शाती है, लेकिन सीमित क्षेत्रफल में बढ़ती आबादी के कारण आपसी संघर्ष की घटनाएं भी बढ़ रही हैं।

सुरक्षा के लिए प्रस्तावित स्पेशल फोर्स अटकी

बाघों की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए राज्य में एक विशेष सुरक्षा बल (स्पेशल फोर्स) गठित करने का प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन अब तक इसे अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका है। विपक्ष ने इसे सरकार की लापरवाही बताते हुए वन्यजीव संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।

संरक्षण और चुनौती दोनों साथ-साथ

प्रदेश के प्रमुख टाइगर रिजर्व जैसे कान्हा राष्ट्रीय उद्यान, बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान और पेंच टाइगर रिजर्व बाघ संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान रखते हैं। यहां लगातार निगरानी, कैमरा ट्रैप, गश्त और ग्रामीण सहभागिता के जरिए संरक्षण कार्य किए जा रहे हैं।

फिर भी करंट से मौत, अवैध शिकार और बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बाघों की बढ़ती संख्या के अनुरूप उनके आवास का विस्तार, वन कॉरिडोर की सुरक्षा और तकनीकी निगरानी तंत्र को और मजबूत करना आवश्यक है।

आगे की राह

वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बाघों की मौत के हर मामले की जांच की जाती है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। साथ ही, संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने और ग्रामीणों को जागरूक करने के प्रयास तेज किए जा रहे हैं।

स्पष्ट है कि जहां एक ओर मध्यप्रदेश ने बाघों की संख्या बढ़ाने में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है, वहीं दूसरी ओर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना अब सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। ‘टाइगर स्टेट’ की छवि को बनाए रखने के लिए संरक्षण और सतर्कता—दोनों को समान प्राथमिकता देनी होगी।