महाराष्ट्र सरकार कुनबी प्रमाण पत्र के लिए बनाएगी विशेष समिति, मराठा समाज को मिलेगा आरक्षण का रास्ता

महाराष्ट्र सरकार कुनबी प्रमाण पत्र के लिए बनाएगी विशेष समिति, मराठा समाज को मिलेगा आरक्षण का रास्ता

मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में लंबे समय से चर्चा का विषय बने मराठा आरक्षण आंदोलन को लेकर बड़ा मोड़ आया है। मराठा आरक्षण की लड़ाई लड़ रहे सामाजिक कार्यकर्ता मनोज जरांगे को बड़ी सफलता मिली है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली राज्य सरकार ने मराठा समाज की मांगों पर सहमति जताते हुए घोषणा की है कि समाज को कुनबी जाति प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया जाएगा। यह समिति प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया तय करेगी और इसके आधार पर मराठा समाज को पिछड़ा वर्ग में शामिल कर आरक्षण का लाभ दिलाया जाएगा।

आंदोलन का असर और सरकार की पहल

मनोज जरांगे पिछले कई महीनों से आरक्षण के मुद्दे पर सक्रिय रहे हैं। उन्होंने कई बार अनशन और पदयात्राएं कीं। उनकी मांग थी कि मराठा समाज को कुनबी प्रमाण पत्र दिया जाए, ताकि वे अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) श्रेणी में आकर शिक्षा और नौकरियों में आरक्षण का लाभ उठा सकें।
सरकार और जरांगे के बीच कई दौर की बातचीत चली, लेकिन समाधान नहीं निकल पा रहा था। अंततः बढ़ते जनसमर्थन और सामाजिक दबाव को देखते हुए सरकार ने कदम उठाते हुए जरांगे की प्रमुख मांग मान ली।

कुनबी प्रमाण पत्र क्यों महत्वपूर्ण?

कुनबी जाति महाराष्ट्र में OBC श्रेणी में आती है। जरांगे और उनके समर्थकों का कहना है कि ऐतिहासिक रूप से मराठा और कुनबी समाज की जड़ें एक जैसी हैं। यदि मराठाओं को कुनबी प्रमाण पत्र मिल जाता है तो उन्हें भी OBC कोटे में मिलने वाले आरक्षण का सीधा लाभ मिल सकेगा। सरकार की समिति अब इस मुद्दे की जांच करेगी और प्रमाण पत्र देने की प्रक्रिया तय करेगी।

जरांगे का बयान

सरकार के इस फैसले के बाद मनोज जरांगे ने कहा, “यह आंदोलन किसी एक व्यक्ति का नहीं बल्कि पूरी पीढ़ी का है। हम मराठा समाज के हक के लिए लड़ते रहेंगे। सरकार ने सकारात्मक कदम उठाया है, लेकिन अब हमें उम्मीद है कि समिति जल्द काम शुरू करेगी और समाज को ठोस परिणाम देगी।”

राजनीतिक महत्व

मराठा आरक्षण महाराष्ट्र की राजनीति में हमेशा से संवेदनशील मुद्दा रहा है। विभिन्न सरकारों ने समय-समय पर प्रयास किए, लेकिन कानूनी पेचीदगियों और प्रक्रियात्मक अड़चनों के कारण आरक्षण का मसला अटका रहा। इस बार जरांगे के आंदोलन ने इसे नया आयाम दिया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार का यह फैसला मराठा समाज को साधने का बड़ा प्रयास है, जिसका असर आने वाले चुनावों में देखने को मिलेगा।

समाज में खुशी की लहर

सरकार की घोषणा के बाद मराठा समाज के विभिन्न हिस्सों में जश्न का माहौल देखा गया। लोगों ने इसे ऐतिहासिक जीत बताया और कहा कि इससे समाज की आने वाली पीढ़ियों को शिक्षा और रोजगार में अवसर मिलेंगे।