महाराष्ट्र में नगर परिषद और नगर पंचायत चुनावों के नतीजों ने सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन की ताकत को एक बार फिर साबित कर दिया है। रविवार को घोषित परिणामों में भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति ने 288 में से 207 नगर परिषद अध्यक्ष पदों पर जीत दर्ज कर विपक्ष को करारी शिकस्त दी।
इस शानदार जीत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाराष्ट्र की जनता को बधाई दी। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा कि यह परिणाम जन-केंद्रित विकास के उनके विजन में जनता के भरोसे को दर्शाता है और महाराष्ट्र विकास के साथ मजबूती से खड़ा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के पोस्ट को साझा करते हुए कहा कि नगर परिषद और नगर पंचायत चुनावों में भाजपा और महायुति को मिला जनादेश राज्य के लोगों की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं की जमीनी मेहनत और प्रतिबद्धता की भी सराहना की।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने इस जीत को ऐतिहासिक जनादेश बताते हुए कहा कि यह पार्टी कार्यकर्ताओं के निरंतर परिश्रम और नेतृत्व पर जनता के भरोसे का नतीजा है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और पार्टी संगठन के मार्गदर्शन को इस सफलता का श्रेय दिया।
चुनाव आयोग के अनुसार, भाजपा, शिवसेना और एनसीपी से मिलकर बने महायुति गठबंधन ने कुल 207 नगर परिषद अध्यक्ष पदों पर जीत हासिल की। इनमें अकेले भाजपा के 117, शिवसेना के लगभग 53 और अजित पवार गुट की एनसीपी के 37 अध्यक्ष चुने गए।
वहीं पार्षदों की बात करें तो 2025 के चुनाव में कुल 6952 सीटों में से भाजपा ने 3325 सीटें जीतीं, जबकि महायुति ने कुल 4133 सीटों (62.30 प्रतिशत) पर विजय दर्ज की।
कांग्रेस समर्थित महा विकास अघाड़ी (एमवीए) इस चुनाव में 50 सीटों का आंकड़ा भी नहीं छू सकी। कांग्रेस को 28, शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) को 9 और शरद पवार की एनसीपी (एसपी) को 8 नगर परिषद अध्यक्ष पदों पर ही संतोष करना पड़ा।
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इन परिणामों को 15 जनवरी को होने वाले नगर निगम चुनावों का ‘ट्रेलर’ बताया। उन्होंने कहा कि जनता ने विकास को प्राथमिकता दी है और आने वाले चुनावों में भी महायुति यही प्रदर्शन दोहराएगी।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इसे पार्टी कार्यकर्ताओं की जीत बताते हुए सभी को बधाई दी। वहीं विपक्षी दलों कांग्रेस और शिवसेना (उबाठा) ने चुनाव आयोग पर सत्तारूढ़ गठबंधन की मदद करने के आरोप लगाए और महायुति की जीत के लिए धनबल व बाहुबल को जिम्मेदार ठहराया।
कुल मिलाकर, महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजों ने राज्य की राजनीति में महायुति की स्थिति को और मजबूत किया है और आने वाले नगर निगम चुनावों से पहले सियासी माहौल को साफ संकेत दे दिया है।