बच्चों की सुरक्षा में बड़ी चूक: राष्ट्रीय वर्किंग विद चिल्ड्रन चेक सिस्टम लागू करने का ऐलान

बच्चों की सुरक्षा में बड़ी चूक: राष्ट्रीय वर्किंग विद चिल्ड्रन चेक सिस्टम लागू करने का ऐलान

मेलबर्न के एक चाइल्डकैअर सेंटर में बच्चों के साथ कथित यौन शोषण के सनसनीखेज मामले के बाद, ऑस्ट्रेलियाई संघीय सरकार ने बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक राष्ट्रीय स्तर पर वर्किंग विद चिल्ड्रन चेक सिस्टम लागू करने का दृढ़ संकल्प व्यक्त किया है। यह कदम बच्चों के साथ काम करने वाले कर्मचारियों की पृष्ठभूमि की जांच को मजबूत करने के लिए उठाया जा रहा है।

मामला और आरोप

विक्टोरिया पुलिस ने हाल ही में जोशुआ डेल ब्राउन (26) नाम के एक व्यक्ति के खिलाफ 70 से अधिक गंभीर आरोप लगाए हैं, जिनमें बाल यौन शोषण और बाल अश्लील सामग्री रखने जैसे संगीन मामले शामिल हैं। ब्राउन पॉइंट कुक के “क्रिएटिव गार्डन अर्ली लर्निंग सेंटर” में कार्यरत था और उसके पास वर्किंग विद चिल्ड्रन चेक था, लेकिन इसके बावजूद यह भयावह अपराध सामने आया।

संघीय सरकार की प्रतिक्रिया

इस घटना के बाद पूरे देश में आक्रोश फैल गया है और बच्चों की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाने की मांग जोर पकड़ने लगी है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए संघीय अटॉर्नी जनरल मिशेल रोलैंड ने कहा कि राष्ट्रीय वर्किंग विद चिल्ड्रन चेक सिस्टम को लागू करना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा, “यह पहली चीज होगी, जिसे मैं अपने राज्यों और क्षेत्रों के समकक्षों के साथ बैठक में उठाऊंगी।”

मिशेल रोलैंड ने कहा कि यह मुद्दा 2015 में चाइल्ड सेफ्टी पर हुई रॉयल कमीशन की रिपोर्ट में भी उठाया गया था, लेकिन अब दस साल बाद भी इस दिशा में पर्याप्त प्रगति नहीं हुई है। उन्होंने कहा, “हम अब सिर्फ चर्चा नहीं कर रहे, बल्कि वास्तविक कदम उठाने का वक्त आ गया है। हम एक ऐसा सिस्टम चाहते हैं जो राज्य-क्षेत्रों के बीच जानकारी का त्वरित और सुरक्षित आदान-प्रदान कर सके।”

वर्तमान व्यवस्था की कमियां

वर्तमान में वर्किंग विद चिल्ड्रन चेक प्रणाली राज्यों और क्षेत्रों के स्तर पर अलग-अलग होती है। अलग-अलग प्रदेश अपनी जांच प्रक्रिया संचालित करते हैं, जिनके बीच सूचना साझा करने का कोई राष्ट्रीय नेटवर्क नहीं है। इससे ऐसे अपराधियों को पकड़ना मुश्किल हो जाता है जो एक राज्य से दूसरे राज्य जाकर काम करते हैं।

अन्य सरकार के प्रयास

शिक्षा मंत्री जेसन क्लेयर ने भी इस मुद्दे पर कहा है कि वे ऐसे कानून लेकर आएंगे, जिससे संघीय सरकार उन चाइल्डकैअर केंद्रों को फंडिंग रोक सकेगी, जो बच्चों की सुरक्षा के मानकों पर खरे नहीं उतरते। उन्होंने कहा कि फंडिंग ही सरकार का एक बड़ा हथियार होगा, जिससे वे बच्चों के लिए सुरक्षित माहौल सुनिश्चित कर सकें।