सिडनी/मेलबर्न।
ऑस्ट्रेलिया के आपातकालीन विभागों (Emergency Departments) से एक गंभीर और चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई है। रिपोर्टों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, महिलाओं की जटिल चिकित्सा स्थितियों की पहचान डॉक्टर समय पर करने में असफल हो रहे हैं। इसके चलते कई महिलाएँ असहनीय दर्द, अनावश्यक शल्यक्रियाएँ (सर्जरी) और यहाँ तक कि बांझपन (Infertility) जैसी त्रासदी का सामना करने को मजबूर हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जब महिलाएँ तेज़ पेट दर्द या प्रजनन तंत्र से जुड़ी समस्याओं के साथ अस्पताल पहुँचती हैं, तो कई बार डॉक्टर उनकी शिकायत को "साधारण समस्या" मानकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं। परिणामस्वरूप, एंडोमेट्रियोसिस (गर्भाशय से जुड़ी जटिल बीमारी), पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिज़ीज़ या अन्य गंभीर रोगों की पहचान देर से हो पाती है।
इन बीमारियों की देर से पहचान का सबसे बड़ा खामियाज़ा महिलाओं को उठाना पड़ता है। समय पर इलाज न मिलने से रोग बढ़ता चला जाता है और डॉक्टरों को अंततः बड़े व दर्दनाक ऑपरेशन करने पड़ते हैं। कई बार गर्भाशय निकालना जैसी कठिन परिस्थितियाँ उत्पन्न होती हैं, जो सीधे तौर पर महिलाओं की मातृत्व क्षमता छीन लेती हैं।
इस स्थिति को स्वास्थ्य जगत में "Medical Misogyny" कहा जा रहा है, जिसका अर्थ है — चिकित्सा व्यवस्था में महिलाओं की तकलीफ़ों को गंभीरता से न लेना। ऑस्ट्रेलिया की महिला रोग विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह स्वास्थ्य प्रणाली में गहराई तक पैठी लैंगिक असमानता का नतीजा है।
कई महिलाओं ने मीडिया से बातचीत में बताया कि जब उन्होंने आपातकालीन वार्ड में तेज़ दर्द और गंभीर लक्षणों की शिकायत की, तो उन्हें "दर्द सहने" या "गैस और मामूली हार्मोनल समस्या" जैसी सलाह देकर घर भेज दिया गया। बाद में जब बीमारी बढ़ी, तो उन्हें कठोर सर्जरी झेलनी पड़ी।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि स्वास्थ्य प्रणाली में संवेदनशीलता और त्वरित पहचान की प्रक्रिया विकसित नहीं की गई, तो भविष्य में और भी बड़ी संख्या में महिलाएँ गंभीर परिणाम भुगतेंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि डॉक्टरों को विशेष प्रशिक्षण देकर महिला रोगों के प्रति जागरूक बनाना आवश्यक है।
महिला अधिकार संगठनों ने मांग की है कि ऑस्ट्रेलियाई सरकार और स्वास्थ्य विभाग इस मुद्दे पर तुरंत कार्रवाई करें। अस्पतालों में विशेष महिला स्वास्थ्य इकाइयाँ स्थापित की जाएँ और मेडिकल शिक्षा में महिलाओं की जटिल स्वास्थ्य स्थितियों पर विशेष ध्यान दिया जाए।