जेंडर सर्जरी के लिए मेडिकेयर फंडिंग पर रोक, ‘जरूरत पूरी न होने’ के बावजूद

जेंडर सर्जरी के लिए मेडिकेयर फंडिंग पर रोक, ‘जरूरत पूरी न होने’ के बावजूद

जेंडर-ए़फ़र्मिंग सर्जरी की मांग और चिकित्सकीय आवश्यकता के बावजूद ऑस्ट्रेलिया में मेडिकेयर फंडिंग को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। प्रमुख चिकित्सा संगठनों ने सरकार से अपील की है कि कम से कम 30 तरह की जेंडर-ए़फ़र्मिंग सर्जरी को मेडिकेयर सब्सिडी में शामिल किया जाए, ताकि ट्रांसजेंडर और जेंडर-डायवर्स समुदाय को सुलभ इलाज मिल सके।

हालांकि, सरकारी सलाहकार समिति — जो सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में किन उपचारों को फंड किया जाए, यह तय करती है — ने फिलहाल इस पर रोक लगाई है। समिति ने कहा है कि इस प्रकार की सर्जरी को स्थायी रूप से सब्सिडी में शामिल करने से पहले ‘पश्चाताप दर’ (regret rate) और लंबी अवधि के परिणामों पर अधिक शोध व ठोस आंकड़ों की आवश्यकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रांस और जेंडर-डायवर्स व्यक्तियों के लिए सर्जरी न केवल शारीरिक बदलाव का साधन है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक पहचान से जुड़ा अहम कदम भी है। समर्थकों का तर्क है कि मौजूदा नीतियां “जरूरतमंद मरीजों को आर्थिक कारणों से इलाज से वंचित कर रही हैं।”

विरोधी पक्ष का मानना है कि चूंकि इन सर्जरी के बाद कभी-कभी पछतावा भी देखा गया है, इसलिए सरकारी फंडिंग से पहले लंबी अवधि के डेटा का अध्ययन जरूरी है।

सरकार ने संकेत दिया है कि विषय पर आगे की समीक्षा और विशेषज्ञ सलाह के बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा। इस बीच, ट्रांस अधिकार समूहों ने चेतावनी दी है कि देरी से समुदाय में मानसिक तनाव और स्वास्थ्य जोखिम बढ़ सकते हैं।