सिडनी, 4 अगस्त: न्यू साउथ वेल्स (NSW) के मुख्यमंत्री क्रिस मिन्स ने हार्बर ब्रिज पर फिलिस्तीन के समर्थन में हुए मार्च को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले को "खुली छूट" के तौर पर न देखा जाए और यह जरूरी नहीं कि हर किसी को भविष्य में इसी तरह की अनुमति दी जाएगी।
मुख्यमंत्री मिन्स ने कहा कि सरकार वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के प्रभावों का अध्ययन कर रही है, जिसमें 90,000 लोगों को सिडनी हार्बर ब्रिज पर मार्च करने की अनुमति दी गई थी। यह मार्च फिलिस्तीन के समर्थन में आयोजित किया गया था।
उन्होंने कहा, “हम इस फैसले की मिसाल को लेकर चिंतित हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि अब कोई भी समूह, किसी भी कारण से, कभी भी ब्रिज पर मार्च निकाल सकता है। हमें सार्वजनिक सुरक्षा, यातायात और अन्य नागरिकों के अधिकारों का भी ध्यान रखना होता है।”
मिन्स ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी समुदाय को निशाना बनाना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में ऐसे आयोजनों के लिए उचित प्रक्रिया और सुरक्षा उपायों को ध्यान में रखा जाए।
सिडनी हार्बर ब्रिज राज्य की प्रमुख संरचनाओं में से एक है और किसी भी बड़े आयोजन का उस पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए सरकार नहीं चाहती कि इस मामले में कोई गलत मिसाल कायम हो।
प्रशासनिक स्तर पर समीक्षा जारी
NSW सरकार और संबंधित एजेंसियां इस फैसले के दूरगामी प्रभावों की समीक्षा कर रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि अगर यह मिसाल बन गई, तो भविष्य में अन्य समूह भी इसी तरह की मांगें कर सकते हैं, जिससे कानून-व्यवस्था और यातायात व्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा।
मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का सम्मान करती है, लेकिन इसके लिए एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाया जाएगा ताकि सभी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा हो सके।