नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय व्याख्यानमाला के अंतिम दिन संघ प्रमुख मोहन भागवत ने भाजपा अध्यक्ष के चयन को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि भाजपा अध्यक्ष चुनने की प्रक्रिया में संघ का कोई प्रत्यक्ष हस्तक्षेप नहीं होता।
भागवत ने कहा, “मैं शाखा चलाने में माहिर हूं और भाजपा सरकार चलाने में माहिर है। हम एक-दूसरे को केवल सुझाव दे सकते हैं। हम फैसले नहीं करते। अगर हमें फैसला करना होता तो क्या इसमें इतना समय लगता?”
संघ प्रमुख ने सरकार के साथ रिश्तों और समन्वय पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि केवल मौजूदा भाजपा सरकार ही नहीं, बल्कि हर सरकार के साथ संघ का अच्छा संवाद रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संघ कभी भी दबाव समूह की तरह कार्य नहीं करता और न ही स्वयंसेवकों या संगठनों पर नियंत्रण करता है।
यह तीन दिवसीय व्याख्यानमाला ‘आरएसएस की 100 वर्ष की यात्रा : नए क्षितिज’ विषय पर दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित की गई। इसमें देशभर से विचारकों, विद्वानों और समाजसेवियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य संघ की सौ वर्षों की यात्रा, उपलब्धियों और आने वाले समय की दिशा पर विमर्श करना था।
👉 मोहन भागवत का यह बयान भाजपा अध्यक्ष पद को लेकर चल रही चर्चाओं और अटकलों के बीच आया है, जिसे राजनीतिक हलकों में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।