राज्य में पहली बार: कुख्यात यौन अपराधी ने ली स्वैच्छिक मृत्यु

राज्य में पहली बार: कुख्यात यौन अपराधी ने ली स्वैच्छिक मृत्यु

राज्य में स्वैच्छिक मृत्यु सहायता (Voluntary Assisted Dying - VAD) कानून के तहत एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने व्यापक बहस छेड़ दी है। एक कुख्यात यौन अपराधी, जिसे उसकी दरिंदापूर्ण हरकतों के लिए 30 साल की सजा मिली थी, जेल की सलाखों के पीछे रहने के बजाय “गरिमा के साथ मौत” को चुन गया।

अपराध और सजा

यह अपराधी अपने जघन्य यौन अपराधों के लिए बदनाम था। अदालत ने उसके अपराधों को इतना गंभीर माना कि उसे 30 वर्ष तक जेल में रखने का आदेश दिया गया था। पीड़ित परिवार और समाज, दोनों ही उम्मीद कर रहे थे कि वह अपनी सजा पूरी करेगा।

पहली बार जेल में VAD

लेकिन, इसी दौरान उसे गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो गईं और उसने VAD प्रक्रिया के तहत जीवन समाप्त करने की अनुमति मांगी। राज्य सरकार और जेल प्रशासन ने कानूनी समीक्षा के बाद उसकी मांग मंज़ूर कर ली। इस तरह वह जेल में रहते हुए स्वैच्छिक मृत्यु चुनने वाला राज्य का पहला कैदी बन गया

विवाद और बहस

यह फैसला अब गंभीर विवाद का विषय बन गया है। एक ओर समर्थकों का कहना है कि गंभीर बीमारी से जूझ रहे व्यक्ति को मौत चुनने का अधिकार है, चाहे वह कैदी ही क्यों न हो। दूसरी ओर, पीड़ित परिवार और समाज के कई वर्गों का मानना है कि इस तरह अपराधी को अपनी सजा भुगते बिना ही छूट मिल गई।

समाज के लिए सवाल

इस घटना ने न्याय, करुणा और सजा के अधिकार को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या जघन्य अपराध करने वाले को भी “गरिमा के साथ मृत्यु” का अधिकार होना चाहिए? या फिर उसे अपनी सजा पूरी करनी चाहिए थी? राज्य में यह बहस फिलहाल जारी है।