कैनबरा।
ऑस्ट्रेलिया की बहुप्रचारित राष्ट्रीय ब्रॉडबैंड नेटवर्क (एनबीएन) परियोजना को पूरी तरह फुल-फाइबर नेटवर्क में बदलने में अब भी लंबा समय लगेगा। हाल ही में सार्वजनिक हुए सरकारी दस्तावेज़ों से खुलासा हुआ है कि इस परियोजना की वास्तविक ‘पूर्णता’ अभी कम से कम 14 वर्ष दूर है, और इसके लिए कुल अवधि 31 वर्षों तक खिंच चुकी है।
दस्तावेज़ों के अनुसार, एनबीएन का फुल-फाइबर रोलआउट न केवल सरकार के शुरुआती अनुमानों से कहीं अधिक धीमा है, बल्कि इसकी कुल लागत भी पहले की तुलना में काफी बढ़ गई है। परियोजना की शुरुआत के समय यह दावा किया गया था कि देशभर में तेज़, भरोसेमंद और आधुनिक इंटरनेट ढांचा अपेक्षाकृत कम समय में तैयार कर लिया जाएगा, लेकिन मौजूदा हालात इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।
सरकारी रिपोर्ट बताती है कि बढ़ती निर्माण लागत, श्रम खर्च, आपूर्ति श्रृंखला में बाधाएँ और तकनीकी जटिलताएँ परियोजना के विस्तार में मुख्य कारण रही हैं। विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज़ इलाकों में फुल-फाइबर नेटवर्क पहुंचाना अपेक्षा से कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण साबित हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वर्षों के दौरान तकनीकी मॉडल में बार-बार किए गए बदलावों—जैसे फाइबर से कॉपर आधारित मिश्रित तकनीक अपनाना और फिर दोबारा फुल-फाइबर की ओर लौटना—ने परियोजना की रफ्तार को और धीमा कर दिया।
तेज़ इंटरनेट को आधुनिक अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। एनबीएन में हो रही देरी का सीधा असर ऑनलाइन शिक्षा, डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं, छोटे व्यवसायों और स्टार्टअप्स पर पड़ रहा है। कई उपभोक्ताओं को अभी भी अपेक्षित स्पीड और स्थिरता नहीं मिल पा रही है, जिससे डिजिटल असमानता बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
इस खुलासे के बाद राजनीतिक गलियारों में भी बहस तेज़ हो गई है। विपक्षी दलों ने सरकार पर परियोजना के प्रबंधन में विफलता का आरोप लगाते हुए कहा है कि जनता को समय और लागत को लेकर गुमराह किया गया। उन्होंने इस पूरे मामले की स्वतंत्र समीक्षा और स्पष्ट समय-सीमा तय करने की मांग की है।
वहीं सरकार का कहना है कि चुनौतियों के बावजूद एनबीएन नेटवर्क की गुणवत्ता में निरंतर सुधार किया जा रहा है और हर वर्ष लाखों घरों और व्यवसायों को बेहतर इंटरनेट सेवाओं से जोड़ा जा रहा है। सरकार का दावा है कि लंबी अवधि में यह निवेश देश की डिजिटल क्षमता को मजबूत करेगा।
हालाँकि सरकार और एनबीएन प्रबंधन भविष्य को लेकर आशावादी रुख दिखा रहे हैं, लेकिन सामने आए दस्तावेज़ यह स्पष्ट करते हैं कि ऑस्ट्रेलिया को पूर्ण फुल-फाइबर ब्रॉडबैंड नेटवर्क के लिए अभी लंबा इंतज़ार करना होगा—और इसकी कीमत भी उम्मीद से ज़्यादा चुकानी पड़ेगी।