नई दिल्ली, 17 मार्च।
बिहार, हरियाणा और ओडिशा में राज्यसभा की 11 सीटों के लिए हुए चुनाव के नतीजों ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। क्रॉस वोटिंग के चलते राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने 11 में से 9 सीटों पर जीत दर्ज कर विपक्ष को बड़ा झटका दिया। वहीं कांग्रेस और बीजू जनता दल (बीजद) को एक-एक सीट से संतोष करना पड़ा।
बिहार में एनडीए का क्लीन स्वीप
बिहार में राज्यसभा की पांचों सीटों पर एनडीए ने कब्जा कर लिया। मतदान के दौरान कांग्रेस के तीन और राजद के एक विधायक के वोटिंग से दूरी बनाने के कारण महागठबंधन की स्थिति कमजोर पड़ गई। एनडीए के उम्मीदवार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष नितिन नवीन, आरएलएम प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा और केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर ने प्रथम वरीयता के मतों के आधार पर जीत हासिल की।
वहीं पांचवें उम्मीदवार शिवेश राम ने द्वितीय वरीयता के मतों में बढ़त बनाकर जीत दर्ज की।
नीतीश कुमार और नितिन नवीन को जीत के लिए आवश्यक 41 प्रथम वरीयता मतों के मुकाबले 44-44 मत मिले, जबकि रामनाथ ठाकुर और उपेंद्र कुशवाहा को 42-42 मत प्राप्त हुए।
ओडिशा में भाजपा की बढ़त
ओडिशा में हुए चुनाव में भाजपा ने तीन सीटों पर जीत हासिल की, जबकि एक सीट बीजू जनता दल के खाते में गई। राज्य में यह परिणाम भाजपा के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव को दर्शाता है।
हरियाणा में भाजपा और कांग्रेस को एक-एक सीट
हरियाणा में दो सीटों के लिए हुए चुनाव में भाजपा और कांग्रेस ने एक-एक सीट जीती। यहां मुकाबला कड़ा रहा, लेकिन दोनों प्रमुख दल अपने-अपने उम्मीदवारों को राज्यसभा भेजने में सफल रहे।
क्रॉस वोटिंग से बदला चुनावी गणित
इन चुनावों में कई जगह क्रॉस वोटिंग ने राजनीतिक समीकरण बदल दिए। खासकर बिहार में विपक्षी खेमे के कुछ विधायकों के मतदान से दूर रहने और संभावित क्रॉस वोटिंग ने एनडीए के पक्ष में माहौल बना दिया।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, इन नतीजों ने विपक्षी दलों के बीच समन्वय की कमी को उजागर किया है, जबकि एनडीए ने रणनीतिक बढ़त हासिल की है। आगामी चुनावी राजनीति पर भी इन परिणामों का असर देखने को मिल सकता है।