NDIS में बड़ा खुलासा: ₹8 करोड़ से अधिक के पैकेज वाले दिव्यांग लाभार्थी शोषण का शिकार, ‘बंधक’ बनाए जाने के आरोप

NDIS में बड़ा खुलासा: ₹8 करोड़ से अधिक के पैकेज वाले दिव्यांग लाभार्थी शोषण का शिकार, ‘बंधक’ बनाए जाने के आरोप

कैनबरा। ऑस्ट्रेलिया की नेशनल डिसएबिलिटी इंश्योरेंस स्कीम (NDIS) से जुड़े एक चौंकाने वाले खुलासे में यह सामने आया है कि करोड़ों रुपये के विशेष सहायता पैकेज पाने वाले कई दिव्यांग लाभार्थियों को कुछ कथित ‘रोग’ सेवा प्रदाताओं द्वारा शोषण, नियंत्रण और जबरन निर्भरता की स्थिति में रखा जा रहा है।

व्हिसलब्लोअर्स (सूचना देने वालों) ने आरोप लगाया है कि कुछ प्रतिभागियों के पास 10 लाख ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (लगभग ₹8–9 करोड़) तक के वार्षिक पैकेज हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें न तो स्वतंत्र निर्णय लेने दिया जा रहा है और न ही अपनी सेवा प्रदाता कंपनी बदलने की आज़ादी है। आरोप है कि इन लाभार्थियों को एक प्रदाता से दूसरे प्रदाता को “बेचा” या “हस्तांतरित” किया जाता है, जैसे वे कोई संपत्ति हों।

सेवा नहीं, नियंत्रण का तंत्र

सूत्रों के अनुसार, कुछ निजी प्रदाता लाभार्थियों की पूरी जीवनशैली, आवास, देखभाल और वित्तीय फैसलों पर कब्ज़ा कर लेते हैं। कई मामलों में प्रतिभागियों को यह भी नहीं बताया जाता कि वे कानूनी रूप से प्रदाता बदल सकते हैं या शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

डर और निर्भरता का माहौल

व्हिसलब्लोअर्स का कहना है कि दिव्यांग प्रतिभागियों को जानबूझकर भय और भ्रम में रखा जाता है ताकि वे सिस्टम से बाहर न निकल सकें। कई पीड़ितों को यह विश्वास दिलाया गया कि अगर उन्होंने सवाल उठाए तो उनकी देखभाल बंद कर दी जाएगी।

सरकारी निगरानी पर सवाल

इस खुलासे के बाद NDIS की निगरानी व्यवस्था और निजी सेवा प्रदाताओं पर सरकारी नियंत्रण को लेकर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी बड़ी धनराशि से जुड़ी योजनाओं में पारदर्शिता और स्वतंत्र ऑडिट बेहद ज़रूरी है, ताकि दिव्यांगों के अधिकारों की रक्षा हो सके।

जांच की मांग तेज

मानवाधिकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस मामले में तत्काल स्वतंत्र जांच, दोषी प्रदाताओं पर कड़ी कार्रवाई और पीड़ित प्रतिभागियों को सुरक्षित विकल्प उपलब्ध कराने की मांग की है।