देश की संसद का मानसून सत्र आज से शुरू हो रहा है और इसकी सबसे बड़ी खासियत होगी आयकर कानून में ऐतिहासिक बदलाव। 60 साल पुराने आयकर अधिनियम, 1961 को खत्म कर एक नया और सरल आयकर विधेयक-2025 लाने की तैयारी है। इस विधेयक की समीक्षा पर बनी प्रवर संसदीय समिति की रिपोर्ट आज लोकसभा में पेश की जाएगी।
13 फरवरी 2025 को बजट सत्र के दौरान लोकसभा में पेश किए गए इस विधेयक का मकसद है—कर प्रक्रिया को आसान बनाना, मुकदमेबाजी को कम करना और करदाताओं को स्पष्टता देना। बैजयंत पांडा की अध्यक्षता में बनी 31 सदस्यीय समिति ने 16 जुलाई को बैठक कर इस विधेयक पर अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया।
कानून का आकार:
मौजूदा आयकर अधिनियम में जहां 5.12 लाख शब्द थे, वहीं नया विधेयक अब सिर्फ 2.6 लाख शब्दों में सिमट गया है।
धाराओं की संख्या:
पुराने कानून में 819 धाराएं थीं, जबकि अब 536 धाराएं होंगी।
अध्याय और प्रावधान:
अध्याय 47 से घटकर 23 रह गए हैं। 1200 प्रावधान और 900 स्पष्टीकरण हटाए गए हैं।
तालिकाओं की संख्या:
पुरानी व्यवस्था में 18 तालिकाएं थीं, अब 57 तालिकाओं के जरिए स्पष्टता लाई गई है।
छूट और TDS/TCS से जुड़े प्रावधानों को सरल भाषा और सारणीबद्ध रूप में रखा गया है।
एनजीओ (गैर-लाभकारी संगठनों) से जुड़े अध्याय को ज्यादा समझने योग्य बनाया गया है।
अब तक आयकर में "पिछला वर्ष" और "आकलन वर्ष" की व्यवस्था लागू थी। जैसे 2023-24 में हुई आय पर टैक्स 2024-25 में देना होता था।
लेकिन नया विधेयक अब सीधे "कर वर्ष" की अवधारणा को अपनाता है, जिससे प्रक्रिया और अधिक स्पष्ट और सरल हो जाएगी।
मणिपुर वस्तु एवं सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2025
जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) विधेयक, 2025
भारतीय प्रबंधन संस्थान (संशोधन) विधेयक, 2025
कराधान कानून (संशोधन) विधेयक, 2025
भू-विरासत स्थल और भू-अवशेष (संरक्षण) विधेयक, 2025
खान और खनिज (संशोधन) विधेयक, 2025
राष्ट्रीय खेल प्रशासन विधेयक, 2025
नेशनल एंटी-डोपिंग संशोधन विधेयक, 2025
सरकार कारोबार करने की प्रक्रिया को आसान बनाने पर ज़ोर दे रही है। "जन विश्वास विधेयक" का उद्देश्य है नियामक सुधार और अनुपालन को सरल बनाना। इसके ज़रिए सरकारी प्रक्रियाओं में विश्वास बढ़ेगा और लालफीताशाही में कमी आएगी।