भारत–अमेरिका ट्रेड डील पर विपक्ष का तीखा हमला, सरकार पर राष्ट्रीय हितों से समझौते का आरोप

भारत–अमेरिका ट्रेड डील पर विपक्ष का तीखा हमला, सरकार पर राष्ट्रीय हितों से समझौते का आरोप

नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते (ट्रेड डील) को लेकर देश की सियासत गरमा गई है। विपक्षी दलों ने इस डील को भारत के हितों के खिलाफ बताते हुए केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। आम आदमी पार्टी, शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) और कांग्रेस ने अलग–अलग बयानों में कहा है कि यह समझौता असंतुलित है और इससे भारत को नुकसान जबकि अमेरिका को सीधा लाभ होगा।

आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने कहा कि सरकार जिस ट्रेड डील को उपलब्धि बता रही है, वह दरअसल भारत के लिए घाटे का सौदा है। उन्होंने आरोप लगाया कि समझौते के तहत अमेरिकी सामान भारत में बिना टैक्स के आएगा, जबकि भारत से अमेरिका जाने वाले उत्पादों पर 18 प्रतिशत तक टैक्स लगाया जाएगा। संजय सिंह ने यह भी कहा कि अमेरिका भारत पर रूस से तेल न खरीदने का दबाव बना रहा है, जिससे भारत को सालाना 70 से 80 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है।

शिवसेना (यूबीटी) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि इस कथित डील से अमेरिका को फायदा होगा, जबकि भारत के छोटे और मझोले उद्योग (MSME) पहले से ही संकट में हैं। उन्होंने कहा कि सरकार इसे डील बता रही है, जबकि असल में यह अमेरिका की ओर से आया हुआ एक “फरमान” है। प्रियंका चतुर्वेदी ने दावा किया कि केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के पास भी इस समझौते को लेकर स्पष्ट जवाब नहीं है।

कांग्रेस ने भी भारत–अमेरिका ट्रेड डील को लेकर केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी का आरोप है कि यह समझौता न तो पारदर्शी है और न ही इस पर संसद में व्यापक चर्चा कराई गई है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सरकार ने विपक्ष को विश्वास में लिए बिना ही अमेरिका के दबाव में ऐसी शर्तें स्वीकार कर ली हैं, जो भारतीय किसानों, डेयरी सेक्टर और घरेलू उद्योगों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती हैं।

कांग्रेस के अनुसार, इस डील के जरिए अमेरिकी कृषि, डेयरी और औद्योगिक उत्पाद सस्ते दामों पर भारतीय बाजार में प्रवेश करेंगे, जिससे करोड़ों किसानों और दुग्ध उत्पादकों की आजीविका पर सीधा असर पड़ेगा। पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार एक ओर ‘आत्मनिर्भर भारत’ की बात करती है, जबकि दूसरी ओर विदेशी कंपनियों के लिए बाजार खोलने की नीति अपना रही है।

विपक्ष का यह भी कहना है कि सरकार बड़े कॉरपोरेट घरानों के हितों को प्राथमिकता दे रही है और छोटे व मझोले उद्योगों की अनदेखी कर रही है। कांग्रेस ने मांग की है कि ट्रेड डील से जुड़े सभी दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं और संसद में इस पर विस्तृत बहस कराई जाए। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि यह समझौता मौजूदा स्वरूप में आगे बढ़ता है, तो वह इसके खिलाफ देशव्यापी आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेगी।

कुल मिलाकर, भारत–अमेरिका ट्रेड डील को लेकर विपक्ष का रुख बेहद आक्रामक नजर आ रहा है और केंद्र सरकार से इस पर जवाबदेही तय करने की मांग तेज हो गई है।