नई दिल्ली, 10 मार्च।
मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध संकट के बीच भारत में एलपीजी आपूर्ति को लेकर सरकार सतर्क हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ उच्च स्तरीय बैठक कर देश में रसोई गैस की संभावित कमी की स्थिति की समीक्षा की।
सूत्रों के अनुसार, इजरायल और अमेरिका की सैन्य कार्रवाई तथा ईरान की जवाबी प्रतिक्रिया के कारण क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है। इससे अंतरराष्ट्रीय तेल और गैस आपूर्ति प्रभावित हुई है। खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने की आशंका ने ऊर्जा बाजारों में अनिश्चितता पैदा कर दी है। यह समुद्री मार्ग भारत की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश अपनी लगभग 62 प्रतिशत एलपीजी जरूरतों को आयात के जरिए पूरा करता है।
बैठक में सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने का फैसला किया है, ताकि आम लोगों की रसोई पर इस संकट का असर कम से कम पड़े। इसी के तहत पेट्रोलियम मंत्रालय ने एलपीजी वितरण व्यवस्था में बदलाव करते हुए घरेलू गैस की आपूर्ति को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया है।
आंकड़ों के अनुसार भारत में हर वर्ष करीब 31.3 लाख टन एलपीजी की खपत होती है। इसमें से लगभग 87 प्रतिशत गैस घरेलू उपयोग के लिए और 13 प्रतिशत कमर्शियल सेक्टर—जैसे होटल, रेस्टोरेंट और छोटे उद्योग—को दी जाती है। मौजूदा संकट को देखते हुए कमर्शियल सेक्टर की आपूर्ति में अस्थायी कटौती की जा सकती है।
सरकार ने रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने और एलपीजी वितरण नेटवर्क को मजबूत करने के निर्देश भी दिए हैं। साथ ही गैस सिलेंडर की बुकिंग साइकिल को बढ़ाकर 25 दिन करने पर भी विचार किया जा रहा है, ताकि उपलब्ध संसाधनों का बेहतर प्रबंधन किया जा सके।
एलपीजी आपूर्ति में कमी का असर मुंबई और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में दिखाई देने लगा है, जहां होटल और रेस्टोरेंट उद्योग को गैस की कमी का सामना करना पड़ रहा है। उद्योग संगठनों ने सरकार से जल्द समाधान निकालने की मांग की है।
सरकार का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और आम उपभोक्ताओं को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।