नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को संविधान सदन के ऐतिहासिक सेंट्रल हॉल में 28वें कॉमनवेल्थ स्पीकर्स एंड प्रेसिडिंग ऑफिसर्स कॉन्फ्रेंस (CSPOC) का उद्घाटन किया। यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 14 से 16 जनवरी तक आयोजित किया जा रहा है, जिसमें 42 कॉमनवेल्थ देशों के 60 से अधिक संसदीय अध्यक्ष और पीठासीन अधिकारी भाग ले रहे हैं। इस वर्ष सम्मेलन का विषय “संसदीय लोकतंत्र की प्रभावी डिलीवरी” रखा गया है।
प्रधानमंत्री के आगमन पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला, विदेश मंत्री एस. जयशंकर तथा राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ने उनका स्वागत किया। यह चौथा अवसर है जब CSPOC सम्मेलन भारत में आयोजित हो रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत का लोकतंत्र जनभागीदारी, संवाद और समावेशिता की मजबूत नींव पर खड़ा है। उन्होंने कहा कि आज भारत की राष्ट्रपति देश की पहली नागरिक के रूप में एक महिला हैं और दिल्ली की मुख्यमंत्री भी महिला हैं। यह इस बात का प्रतीक है कि भारतीय महिलाएं लोकतंत्र में केवल भागीदारी ही नहीं, बल्कि नेतृत्व भी कर रही हैं।
प्रधानमंत्री ने 2024 में हुए आम चुनावों को मानव इतिहास का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक अभ्यास बताया। उन्होंने कहा कि लगभग 98 करोड़ नागरिकों ने मतदान के लिए पंजीकरण कराया, जो कई महाद्वीपों की जनसंख्या से भी अधिक है। 8,000 से अधिक उम्मीदवारों और 700 से ज्यादा राजनीतिक दलों की भागीदारी ने भारतीय लोकतंत्र के विशाल स्वरूप को दर्शाया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सेंट्रल हॉल भारत की लोकतांत्रिक यात्रा का साक्षी रहा है। आजादी से पहले इसी स्थान पर संविधान सभा की बैठकें हुई थीं और स्वतंत्रता के बाद 75 वर्षों तक यही भवन भारत की संसद रहा। उन्होंने कहा कि ‘संविधान सदन’ आज भी लोकतंत्र के मूल्यों और परंपराओं का प्रतीक है।
प्रधानमंत्री ने संसदीय लोकतंत्र में स्पीकर की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि स्पीकर का कार्य केवल सदन का संचालन करना नहीं, बल्कि सभी सदस्यों को निष्पक्ष और संतुलित वातावरण उपलब्ध कराना भी है। धैर्य, सहनशीलता और संतुलन एक आदर्श स्पीकर की पहचान हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कॉमनवेल्थ देशों की कुल जनसंख्या का लगभग 50 प्रतिशत भारत में निवास करता है, इसलिए भारत की भूमिका और जिम्मेदारी विशेष है। उन्होंने स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन, आर्थिक विकास और नवाचार जैसे क्षेत्रों में कॉमनवेल्थ के सतत विकास लक्ष्यों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला की अध्यक्षता में आयोजित इस सम्मेलन में कनाडा, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, नाइजीरिया, दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका, मलेशिया, नामीबिया, ट्रिनिडाड और टोबैगो, टोंगा तथा कैमरून सहित कई देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए हैं। सम्मेलन में संसदीय संस्थाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और उत्तरदायी बनाने पर गहन विचार-विमर्श किया जा रहा है।
यह सम्मेलन भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने के साथ-साथ कॉमनवेल्थ देशों के बीच संसदीय सहयोग को नई दिशा देने वाला सिद्ध हो रहा है।