पीएम का हाई-स्पीड दांव: दुनिया की सबसे लंबी रेल सुरंग या सबसे गहरा आर्थिक गड्ढा

एंथनी अल्बनीज़ और ऑस्ट्रेलिया का हाई-स्पीड रेल सपना

पीएम का हाई-स्पीड दांव: दुनिया की सबसे लंबी रेल सुरंग या सबसे गहरा आर्थिक गड्ढा

ऑस्ट्रेलिया में दशकों से हाई-स्पीड रेल परियोजना का सपना देखा जाता रहा है। अब प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ के नेतृत्व में यह सपना एक बार फिर सुर्खियों में है। सरकार का दावा है कि सिडनी से न्यूकैसल तक तेज रफ्तार रेल सेवा शुरू करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह परियोजना देश के परिवहन इतिहास में क्रांतिकारी बदलाव लाएगी, या फिर यह अरबों डॉलर की लागत वाला एक और अधूरा सपना बनकर रह जाएगी?

सरकार की योजना के तहत पूर्वी तट पर प्रमुख शहरों को हाई-स्पीड रेल नेटवर्क से जोड़ने का प्रस्ताव है। इस परियोजना में आधुनिक तकनीक, लंबी सुरंगें और अत्याधुनिक ट्रेनें शामिल होंगी, जिनकी रफ्तार पारंपरिक ट्रेनों से कहीं अधिक होगी। समर्थकों का कहना है कि इससे यात्रा समय में भारी कमी आएगी, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिलेगी।

हालांकि आलोचकों का तर्क है कि परियोजना की अनुमानित लागत लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि भौगोलिक चुनौतियों और निर्माण कार्य की जटिलताओं के कारण खर्च उम्मीद से कहीं अधिक हो सकता है। यदि दुनिया की सबसे लंबी रेल सुरंग बनाने की योजना आगे बढ़ती है, तो यह इंजीनियरिंग का अद्भुत उदाहरण होगा, लेकिन साथ ही वित्तीय जोखिम भी उतना ही बड़ा होगा।

परिवहन विशेषज्ञों का कहना है कि ऑस्ट्रेलिया की कम आबादी घनत्व और लंबी दूरी के कारण हाई-स्पीड रेल की आर्थिक व्यवहार्यता पर गंभीर प्रश्न उठते हैं। वहीं, पर्यावरणविद इसे कार और हवाई यात्रा के मुकाबले अधिक टिकाऊ विकल्प मानते हैं।

फिलहाल परियोजना शुरुआती चरण में है। विस्तृत योजना, बजट और समयसीमा को लेकर कई फैसले बाकी हैं। सरकार का कहना है कि यह भविष्य में निवेश है, जबकि विपक्ष इसे ‘महंगा दांव’ बता रहा है।

न्यूकैसल की यात्रा के लिए उत्साहित लोगों को अभी इंतजार करना होगा। हाई-स्पीड रेल का सपना भले ही करीब नजर आ रहा हो, लेकिन इसकी मंजिल तक पहुंचने का रास्ता लंबा और चुनौतीपूर्ण है। आने वाले वर्षों में ही तय होगा कि यह परियोजना ऑस्ट्रेलिया की परिवहन क्रांति बनेगी या आर्थिक बोझ।