न्यू साउथ वेल्स के प्रीमियर क्रिस मिंस पर उनकी ही पार्टी के सांसद ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि प्रीमियर ने सिडनी की ट्रैफिक व्यवस्था को गाज़ा में भूख से तड़प रहे लोगों की पीड़ा से ऊपर रखा है।
यह विवाद तब बढ़ा जब प्रीमियर मिंस ने यह स्पष्ट कर दिया कि गाज़ा के समर्थन में प्रस्तावित हार्बर ब्रिज मार्च की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने एक संयमित और शांतिपूर्ण बयान देने की कोशिश की, लेकिन अपने फैसले पर अडिग रहे।
पार्टी के भीतर से ही उठी इस आलोचना ने सरकार के फैसले पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मिंस के आलोचक मानते हैं कि यह सिर्फ एक यातायात का मुद्दा नहीं, बल्कि मानवता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मामला है। उनका कहना है कि ऐसे समय में जब गाज़ा में हजारों लोग भूख, हिंसा और मानवीय संकट का सामना कर रहे हैं, तब ऑस्ट्रेलिया में उनके समर्थन में आवाज़ उठाने पर पाबंदी लगाना चिंताजनक है।
हालांकि, प्रीमियर ने कहा कि वे जनता की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं और इसलिए पुल पर मार्च की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार किसी भी संवेदनशील मुद्दे पर लोगों की भावनाओं का सम्मान करती है, लेकिन सार्वजनिक व्यवस्था और यातायात को बनाए रखना भी उनकी जिम्मेदारी है।
इस पूरे घटनाक्रम ने सरकार और उसकी नीतियों पर एक नई बहस छेड़ दी है – क्या लोकतंत्र में विरोध की आवाज़ सड़क पर उतरकर नहीं उठाई जा सकती? क्या ट्रैफिक व्यवस्था मानवीय संकट से ज़्यादा अहम है?