लिबरल पार्टी में विवाद: प्राइस ने हॉक पर लगाया गंभीर आरोप

लिबरल पार्टी में विवाद: प्राइस ने हॉक पर लगाया गंभीर आरोप

कैनबरा।
लिबरल पार्टी के अंदरूनी मतभेद एक बार फिर सुर्खियों में हैं। आदिवासी मामलों पर मुखर रहने वाली सीनेटर जेसिंटा नाम्पीजिन्पा प्राइस ने अपने ही सहयोगी एलेक्स हॉक पर तीखा हमला बोला है।

प्राइस ने हॉक के हाल ही में दिए गए भारतीय प्रवासियों से जुड़े ‘स्पष्टिकरण वाले बयान’ को लेकर उन्हें ‘कायराना व्यवहार’ का दोषी ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि हॉक ने न सिर्फ उन्हें नीचा दिखाने की कोशिश की बल्कि पार्टी के भीतर महिलाओं को ‘गलत तरीके से बर्ताव झेलने’ के लिए छोड़ दिया जाता है।

प्राइस का कहना है कि उनकी पार्टी में महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार को गंभीरता से नहीं लिया जाता। उन्होंने मांग की कि पार्टी को इस रवैये पर पुनर्विचार करना चाहिए, अन्यथा लिबरल्स की विश्वसनीयता पर गहरी चोट पहुंचेगी।

उधर, एलेक्स हॉक ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने दावा किया कि उनका इरादा किसी को अपमानित करने का नहीं था और प्राइस की आपत्तियां बेबुनियाद हैं।

यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब लिबरल पार्टी पहले से ही आंतरिक गुटबाजी और नीतिगत मतभेदों से जूझ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के आरोप पार्टी की छवि को और कमजोर कर सकते हैं।

“समुदायों के बीच सम्मान ज़रूरी”

प्राइस ने कहा, “मैं हमेशा से विभिन्न संस्कृतियों और समुदायों के बीच आपसी सम्मान की पक्षधर रही हूँ। दुर्भाग्यपूर्ण है कि राजनीतिक लाभ के लिए मेरी छवि को नुक़सान पहुँचाने की कोशिश की जा रही है। यह केवल मेरे लिए नहीं बल्कि पूरे भारतीय समुदाय के लिए भी तकलीफ़देह है, क्योंकि उन्हें मेरी मंशा के बारे में ग़लत संदेश दिया गया।”

पार्टी नेतृत्व की चुप्पी

लिबरल पार्टी के भीतर इस बयान के बाद माहौल गरमा गया है। पार्टी नेतृत्व ने इस विवाद पर अब तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। माना जा रहा है कि शीर्ष नेतृत्व फिलहाल स्थिति को संभालने और आंतरिक मतभेदों को शांत करने की रणनीति पर विचार कर रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों की राय

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद लिबरल पार्टी की अंदरूनी दरारों को उजागर करता है। एक ओर पार्टी 2025 के आम चुनावों की तैयारियों में जुटी है, वहीं दूसरी ओर नेताओं के बीच आपसी आरोप-प्रत्यारोप उसकी छवि को नुक़सान पहुँचा सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि नेतृत्व ने इस मुद्दे को समय रहते सुलझाया नहीं, तो इसका असर पार्टी की एकजुटता और भविष्य की रणनीति पर गंभीर हो सकता है।

समुदाय पर असर

इस पूरे विवाद से भारतीय समुदाय में असमंजस की स्थिति बन गई है। एक ओर वे सीनेटर प्राइस के पक्षधर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मीडिया रिपोर्टिंग के बाद उनमें निराशा और नाराज़गी की भावना देखी जा रही है। समुदाय के कुछ प्रतिनिधियों ने अपील की है कि नेताओं को अपने बयानों और राजनीतिक मतभेदों में सावधानी बरतनी चाहिए ताकि समाज में अनावश्यक तनाव न बढ़े।