मेलबर्न में महिला अधिकार रैली के दौरान झड़प

मेलबर्न में महिला अधिकार रैली के दौरान झड़प

मेलबर्न।
शनिवार को मेलबर्न के संसद भवन की सीढ़ियों पर आयोजित “वीमेन विल स्पीक” (Women Will Speak) रैली के दौरान माहौल अचानक हिंसक हो गया। महिला अधिकारों के समर्थन में जुटी भीड़ और ‘प्रो-ट्रांस’ कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हो गई, जिसे काबू करने के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।

पुलिस बनाम प्रदर्शनकारी

रैली शुरू होने से पहले ही कार्लटन गार्डन से संसद तक मार्च करते हुए कुछ कार्यकर्ताओं का पुलिस से टकराव हो गया। काले कपड़ों और चेहरा ढककर आए इन प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने रोका, जिस दौरान कई लोगों को ज़मीन पर गिराकर हिरासत में लिया गया। पुलिस ने संसद भवन के बाहर पानी से भरे अवरोधक (वाटर बैरियर) लगा रखे थे ताकि किसी तरह की तोड़फोड़ या अव्यवस्था न हो।

महिला अधिकार कार्यकर्ताओं की नाराज़गी

रैली में शामिल वक्ताओं ने विक्टोरिया की एंटी-विलिफिकेशन (भेदभाव-विरोधी) क़ानूनों और राज्य की महिला मंत्री नताली हचिन्स की आलोचना की।
एक वक्ता, वनीता ने कहा—
“200 साल की लड़ाई के बाद महिलाओं के अधिकार क्यों छीने जा रहे हैं? क्यों हमें घर और समाज में अपनी बात रखने पर ‘हेट स्पीच’ कहा जा रहा है?”

रैली की प्रमुख आयोजक जैस्मिन ससेक्स ने कहा कि उनका आंदोलन “ट्रांस विरोधी नहीं, बल्कि महिलाओं के अधिकारों के लिए है।” उन्होंने आरोप लगाया कि जेंडर पहचान को कानून में जैविक सेक्स से ऊपर रखकर महिलाओं और बच्चियों के लिए खतरनाक परिस्थितियां पैदा की जा रही हैं।

कट्टरपंथियों की धमकी और विरोधी गुट

इसी बीच, नाज़ी समूहों द्वारा रैली में घुसपैठ की धमकी भी दी गई थी। इस पर आयोजकों ने साफ कहा—
“तुम्हारा यहाँ स्वागत नहीं है। हम तुम्हारे साथ नहीं हैं।”

दूसरी ओर, व्हिसलब्लोअर्स, एक्टिविस्ट्स एंड कम्युनिटीज़ अलायंस जैसे समूहों ने इस आयोजन को “ट्रांसफोबिक” करार देते हुए विरोध की चेतावनी दी थी।

पुलिस और मीडिया पर भी दबाव

विक्टोरिया पुलिस ने बताया कि उन्हें सोशल मीडिया पर ऐसी पोस्ट मिली थीं जिनमें मीडिया की रिपोर्टिंग बाधित करने और कैमरे तोड़ने तक की बातें कही गई थीं। इसी कारण मीडिया को भी अवरोधकों से आगे जाने की अनुमति नहीं दी गई।

निष्कर्ष

करीब 100 से अधिक लोगों की मौजूदगी में यह रैली महिला अधिकारों को लेकर गुस्से और विरोधाभास का प्रतीक बन गई। पुलिस ने हालांकि स्थिति पर काबू पा लिया, लेकिन यह टकराव जेंडर पहचान और महिला अधिकारों पर चल रही बहस को और तेज़ कर गया।