बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर परिसर में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक का प्रस्ताव तैयार

बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर परिसर में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक का प्रस्ताव तैयार

देहरादून, 26 जनवरी।
उत्तराखंड के प्रमुख तीर्थस्थलों बदरीनाथ और केदारनाथ मंदिर परिसरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने की तैयारी की जा रही है। श्री बदरीनाथ‑केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) की आगामी बोर्ड बैठक में इस संबंध में प्रस्ताव लाए जाने की संभावना है। प्रस्ताव पारित होने के बाद इसे राज्य सरकार को भेजा जाएगा।

मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने संकेत दिए हैं कि यह निर्णय धार्मिक परंपराओं, सांस्कृतिक मर्यादाओं और मंदिरों की पवित्रता बनाए रखने के उद्देश्य से लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बदरीनाथ और केदारनाथ केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि सनातन आस्था के केंद्र हैं, जहां सदियों से विशेष धार्मिक परंपराओं का पालन होता आया है।

परंपरा के अनुरूप निर्णय का तर्क

बीकेटीसी का कहना है कि केदारखंड और बदरीखंड क्षेत्र में ऐतिहासिक रूप से मंदिर परिसरों में प्रवेश को लेकर स्पष्ट धार्मिक मर्यादाएं रही हैं। समय के साथ इन परंपराओं के पालन में शिथिलता आई है, जिसे अब औपचारिक रूप से लागू करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। समिति के अनुसार, प्रस्ताव का उद्देश्य किसी वर्ग को निशाना बनाना नहीं, बल्कि धार्मिक स्थल की मूल प्रकृति को संरक्षित रखना है।

सरकार की मंजूरी जरूरी

मंदिर समिति से जुड़े सूत्रों के अनुसार, प्रस्ताव को अंतिम रूप मिलने के बाद राज्य सरकार की स्वीकृति आवश्यक होगी। यदि सरकार सहमति देती है, तो बदरीनाथ-केदारनाथ सहित समिति के अधीन अन्य मंदिरों में भी नए नियम लागू किए जा सकते हैं। इसके लिए दिशा-निर्देश और प्रवेश व्यवस्था तय की जाएगी।

पहले भी उठ चुके हैं ऐसे कदम

उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड के कुछ अन्य धार्मिक स्थलों पर पहले ही गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर प्रतिबंध लागू किए जा चुके हैं। इन्हें धार्मिक परंपरा और स्थानीय मान्यताओं के अनुरूप बताया गया है। इसी क्रम में अब बदरीनाथ और केदारनाथ को लेकर भी स्पष्ट नीति बनाने की तैयारी है।

संभावित बहस और प्रतिक्रिया

इस प्रस्ताव के सामने आने के बाद सामाजिक और संवैधानिक स्तर पर बहस की संभावना भी जताई जा रही है। कुछ वर्ग इसे आस्था से जुड़ा विषय मानते हैं, जबकि कुछ लोग इसे समानता और अधिकारों के दृष्टिकोण से देखते हैं। हालांकि मंदिर समिति का स्पष्ट कहना है कि यह निर्णय धार्मिक संस्था के अधिकार क्षेत्र और परंपरागत मान्यताओं के तहत लिया जा रहा है।

आगे क्या?

अब सबकी निगाहें बीकेटीसी की बोर्ड बैठक और राज्य सरकार के रुख पर टिकी हैं। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो चारधाम यात्रा व्यवस्था में यह एक बड़ा और दूरगामी बदलाव माना जाएगा।