ऑस्ट्रेलिया डे को लेकर जनता का रुख सख़्त, बहिष्कार के ख़िलाफ़ दिखी व्यापक सहमति: सर्वेक्षण

ऑस्ट्रेलिया डे को लेकर जनता का रुख सख़्त, बहिष्कार के ख़िलाफ़ दिखी व्यापक सहमति: सर्वेक्षण

सिडनी।
ऑस्ट्रेलिया डे को लेकर देश में चल रही सामाजिक और राजनीतिक बहस के बीच एक ताज़ा जनमत सर्वेक्षण ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ऑस्ट्रेलियाई जनता का बड़ा वर्ग इस राष्ट्रीय पर्व के बहिष्कार के पक्ष में नहीं है। सर्वेक्षण के अनुसार, अधिकांश नागरिकों ने उन व्यवसायिक प्रतिष्ठानों और संगठनों के प्रति असहमति जताई है, जो ऑस्ट्रेलिया डे समारोहों से दूरी बनाते हैं या सार्वजनिक रूप से इसका बहिष्कार करते हैं।

सर्वे में भाग लेने वाले लोगों का मानना है कि ऑस्ट्रेलिया डे केवल एक अवकाश नहीं, बल्कि देश के इतिहास, सांस्कृतिक पहचान और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है। उत्तरदाताओं ने कहा कि किसी भी मतभेद या ऐतिहासिक असहमति के बावजूद इस दिन का बहिष्कार करना उचित नहीं है।

व्यवसायों के बहिष्कार पर जनता की नाराज़गी

सर्वेक्षण में यह भी सामने आया कि कई उपभोक्ता उन कंपनियों से खरीदारी करने से परहेज़ करने लगे हैं, जो ऑस्ट्रेलिया डे कार्यक्रमों में भाग नहीं लेतीं। लोगों का कहना है कि व्यापारिक संस्थानों को राजनीतिक या वैचारिक रुख अपनाने के बजाय सभी समुदायों को साथ लेकर चलना चाहिए।

एक उत्तरदाता ने कहा,
“अगर कोई कंपनी हमारे राष्ट्रीय दिवस का सम्मान नहीं करती, तो हम भी उसका समर्थन क्यों करें?”

परंपराओं से जुड़ी है ऑस्ट्रेलिया डे की भावना

ऑस्ट्रेलिया डे के अवसर पर देशभर में पारिवारिक समारोह, सामूहिक बारबेक्यू, समुद्र तटों पर जुटान, आतिशबाज़ी और नागरिक सम्मान समारोह आयोजित किए जाते हैं। सर्वेक्षण के अनुसार, अधिकांश नागरिक इन परंपराओं को ऑस्ट्रेलियाई जीवनशैली का अहम हिस्सा मानते हैं और इन्हें बनाए रखने के पक्ष में हैं।

लोगों का मानना है कि यह दिन समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ने का अवसर प्रदान करता है और इसे विभाजन का कारण नहीं बनना चाहिए।

संवाद की ज़रूरत, बहिष्कार समाधान नहीं

हालांकि सर्वे में शामिल कुछ प्रतिभागियों ने यह स्वीकार किया कि ऑस्ट्रेलिया डे से जुड़े ऐतिहासिक पहलुओं और आदिवासी समुदायों की चिंताओं पर खुली चर्चा आवश्यक है, लेकिन उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि बहिष्कार इस दिशा में सकारात्मक कदम नहीं है।

विश्लेषकों के अनुसार, जनता का यह रुख दर्शाता है कि लोग टकराव के बजाय संवाद और आपसी समझ के रास्ते पर आगे बढ़ना चाहते हैं।

विशेषज्ञों की राय

राजनीतिक और सामाजिक विशेषज्ञों का कहना है कि यह सर्वेक्षण नीति निर्माताओं और कॉर्पोरेट जगत के लिए एक स्पष्ट संदेश है। आम जनता चाहती है कि राष्ट्रीय प्रतीकों और पर्वों को विवादों से दूर रखा जाए और सामाजिक मुद्दों पर संतुलित तथा संवेदनशील संवाद किया जाए।