ऑस्ट्रेलिया की श्रम बाज़ार से सामने आई नई जानकारी ने नीति निर्माताओं और अर्थशास्त्रियों को हैरान कर दिया है। हालिया आंकड़ों से पता चला है कि पिछले दो वर्षों में देश में पैदा हुई अधिकांश नौकरियां सरकार द्वारा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से वित्तपोषित रही हैं। 2024 में निजी क्षेत्र ने महज 53,000 नौकरियां जोड़ीं, जबकि कुल रोजगार सृजन का 82 प्रतिशत हिस्सा सार्वजनिक क्षेत्र से आया।
विश्लेषकों का मानना है कि ऑस्ट्रेलिया की आर्थिक संरचना में आई धीमी गति, वैश्विक अस्थिरता और स्थानीय निवेश में कमी के कारण निजी कंपनियां भर्ती से कतराती रहीं। इसके उलट, सरकार ने महंगाई, बेरोजगारी और सामाजिक दबावों से निपटने के लिए भारी पैमाने पर सार्वजनिक सेवा क्षेत्रों — जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवहन और सामाजिक देखभाल — में नौकरियां दीं।
विशेष रूप से स्वास्थ्य और aged-care सेक्टर में बड़ी संख्या में कर्मचारियों की भर्ती हुई है, जिसे महामारी के बाद की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
2023–2024: कुल रोजगार वृद्धि का 82% हिस्सा सरकारी या सरकार-संबंधित क्षेत्र से आया।
निजी क्षेत्र: सिर्फ 53,000 नई नौकरियां, जबकि महामारी से पहले यह आंकड़ा सालाना लाखों में होता था।
राज्य और संघीय सरकारें: बजट का बड़ा हिस्सा अब रोजगार योजनाओं और पब्लिक सेक्टर वेतन में जा रहा है।
सरकारी खर्च का बढ़ता बोझ: बजट घाटा बढ़ सकता है, जिससे टैक्स नीति और सामाजिक सेवाओं पर असर पड़ेगा।
संतुलनहीन रोजगार ढांचा: एक स्वस्थ अर्थव्यवस्था में निजी क्षेत्र को प्रमुख भूमिका निभानी चाहिए, जो अब कमजोर हो रही है।
प्रतियोगी अर्थव्यवस्था में गिरावट: विदेशी निवेशक ऑस्ट्रेलिया के बाज़ार को जोखिमपूर्ण मान सकते हैं।
सिडनी यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर माइकल हडसन कहते हैं, "सरकार की नौकरियों पर बढ़ती निर्भरता अल्पकालिक राहत तो दे सकती है, लेकिन इससे नवाचार, प्रतिस्पर्धा और उत्पादकता पर दीर्घकालिक असर पड़ेगा।"
प्रोत्साहन पैकेज: छोटे और मझोले उद्योगों (SMEs) के लिए टैक्स रियायतें।
स्किल डेवलपमेंट: नौजवानों को तकनीकी और डिजिटल क्षेत्रों में कुशल बनाना।
निवेश आकर्षित करना: विदेशी निवेश के लिए नियमों को सरल बनाना और स्थायित्व देना।