सिडनी, 3 फरवरी।
ऑस्ट्रेलिया के केंद्रीय बैंक रिज़र्व बैंक ऑफ़ ऑस्ट्रेलिया (RBA) द्वारा वर्ष 2026 की पहली मौद्रिक नीति बैठक में ब्याज दरों में बढ़ोतरी के साथ ही वित्तीय बाज़ारों में तेज़ प्रतिक्रिया देखने को मिली। घोषणा के तुरंत बाद ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में ज़ोरदार उछाल आया, जबकि शेयर बाज़ार में गिरावट दर्ज की गई।
आरबीए ने आधिकारिक नकद दर (कैश रेट) में 25 आधार अंकों की वृद्धि की है, जिसके बाद यह दर बढ़कर 3.85 प्रतिशत हो गई। यह जुलाई 2025 के स्तर के बराबर है। यह 2023 के बाद पहली बार है जब केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों में इज़ाफ़ा किया है।
घोषणा के तुरंत बाद ऑस्ट्रेलियाई डॉलर 0.77 प्रतिशत मज़बूत होकर फिर से 70 अमेरिकी सेंट के स्तर के ऊपर पहुँच गया। इसके विपरीत, शेयर बाज़ार में दबाव देखा गया।
आरबीए के फ़ैसले से पहले ASX 200 सूचकांक 1.05 प्रतिशत की बढ़त पर था, लेकिन घोषणा के बाद इसकी बढ़त घटकर 0.76 प्रतिशत रह गई।
बाज़ार विश्लेषकों के अनुसार, ब्याज दरों में बढ़ोतरी से स्थानीय मुद्रा को सहारा मिला है। आईजी मार्केट्स के विश्लेषक टोनी साइकैमोर ने कहा कि ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में हालिया गिरावट केवल अस्थायी सुधार थी, न कि किसी बड़े रुझान में बदलाव का संकेत।
विशेषज्ञों का मानना है कि आगे चलकर ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की दिशा कमोडिटी कीमतों और वैश्विक निवेशकों की जोखिम लेने की प्रवृत्ति पर निर्भर करेगी। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को एक “जोखिम वाली मुद्रा” माना जाता है, क्योंकि इसका प्रदर्शन वैश्विक आर्थिक चक्रों और कच्चे माल की कीमतों से काफ़ी हद तक जुड़ा रहता है।
वेल्थ विदिन के मुख्य विश्लेषक डेल गिलहम के अनुसार, डॉलर की मज़बूती महँगाई को कुछ हद तक नियंत्रित करने में मदद कर सकती है। उन्होंने कहा कि लगभग 70 अमेरिकी सेंट का स्तर ऑस्ट्रेलियाई अर्थव्यवस्था के लिए संतुलन बिंदु माना जाता है।
उनका कहना था कि जब डॉलर 60 सेंट के मध्य स्तर पर होता है, तो ईंधन, इलेक्ट्रॉनिक सामान, वाहन और रोज़मर्रा की वस्तुएँ महँगी हो जाती हैं। वहीं, 70 सेंट के आसपास की स्थिति महँगाई को काबू में रखने में मदद करती है, बिना आर्थिक विकास को नुकसान पहुँचाए।
हालाँकि, विशेषज्ञों ने यह भी स्पष्ट किया कि मज़बूत मुद्रा अपने आप में सभी आर्थिक समस्याओं का समाधान नहीं है, बल्कि यह केवल संकेत देती है कि महँगाई का दबाव धीरे-धीरे कम हो रहा है और वैश्विक निवेश का भरोसा लौट रहा है।