ऑस्ट्रेलिया के केंद्रीय बैंक, रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (आरबीए) ने एक बार फिर ब्याज दरों में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि कर दी है, जिससे आम लोगों पर आर्थिक दबाव और बढ़ने की आशंका है। इस फैसले के बाद आरबीए ने संकेत दिया है कि अर्थव्यवस्था पर इसका असर इतना गंभीर हो सकता है कि मंदी से बच पाना मुश्किल हो जाए।
नई दरों के लागू होने के बाद लगभग 6 लाख डॉलर के होम लोन पर हर महीने करीब 100 डॉलर तक अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा। इससे पहले ही महंगाई और बढ़ती लागत से जूझ रहे परिवारों के बजट पर और दबाव पड़ेगा।
आरबीए का कहना है कि यह कदम बढ़ती महंगाई को नियंत्रित करने के लिए जरूरी है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ती ब्याज दरें उपभोक्ता खर्च को कम कर सकती हैं, जिससे आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।
आर्थिक जानकारों के अनुसार, यदि दरों में बढ़ोतरी का सिलसिला जारी रहा, तो रोजगार बाजार और व्यापारिक गतिविधियों पर भी असर पड़ सकता है। इससे देश में मंदी की स्थिति पैदा होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
सरकार और वित्तीय संस्थाएं अब इस बात पर नजर रखे हुए हैं कि आने वाले महीनों में महंगाई और आर्थिक गतिविधियों में क्या बदलाव आता है। आम नागरिकों के लिए यह समय वित्तीय सतर्कता बरतने और खर्चों को संतुलित रखने का है।