ऑस्ट्रेलिया में आवास संकट लगातार गहराता जा रहा है। देश के अधिकांश प्रमुख शहरों में मकानों का किराया अब तक के सबसे ऊँचे स्तर पर पहुँच गया है। रियल एस्टेट शोध संस्था Domain की रिपोर्ट के अनुसार, मेलबर्न को छोड़कर सभी राजधानी शहरों में किराए रिकॉर्ड ऊँचाई पर हैं। सिडनी में औसतन साप्ताहिक किराया 800 ऑस्ट्रेलियन डॉलर तक पहुँच गया है, जो देश में सबसे महँगा है।
ग्रीन्स पार्टी ने इस स्थिति के लिए केंद्र की लेबर सरकार की आवास और कर नीतियों को ज़िम्मेदार ठहराया है। ग्रीन्स की सीनेटर Barbara Pocock ने कहा कि मौजूदा हालात “नियंत्रण से बाहर होते आवास संकट” का प्रमाण हैं।
सीनेटर पॉकॉक का कहना है कि कैपिटल गेंस टैक्स और नेगेटिव गियरिंग जैसी नीतियाँ अमीर निवेशकों को लाभ पहुँचाती हैं, जबकि पहली बार घर खरीदने वालों को बाज़ार से बाहर कर देती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन्हीं कारणों से किराए तेज़ी से बढ़ रहे हैं और आम किरायेदारों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
डोमेन के एक प्रवक्ता ने कहा कि कोविड-19 महामारी के बाद किराए में जो तेज़ बढ़ोतरी हुई है, वह किरायेदारों के लिए “कुचल देने वाली” साबित हो रही है और राहत के आसार फिलहाल कम नज़र आ रहे हैं।
हालाँकि लेबर सरकार का कहना है कि वह आवास संकट से निपटने के लिए कदम उठा रही है। सरकार ने 10 अरब डॉलर का Housing Australia Future Fund स्थापित किया है और 2022 से अब तक 5,000 से अधिक सामाजिक एवं किफायती घरों का निर्माण किया गया है। इसके अलावा, “हेल्प टू बाय” योजना के तहत पात्र लोगों को सरकार के साथ मिलकर घर खरीदने की सुविधा दी जा रही है, जिसमें सरकार नए घरों की कीमत का 40 प्रतिशत तक वहन करेगी।
ऑस्ट्रेलिया के कोषाध्यक्ष Jim Chalmers ने कहा है कि सरकार जुलाई 2029 तक 12 लाख नए घर बनाने के लक्ष्य पर काम कर रही है, ताकि आवास की कमी को दूर किया जा सके।
वहीं ग्रीन्स पार्टी का मानना है कि ये कदम पर्याप्त नहीं हैं। पार्टी ने किरायेदारों को तत्काल राहत देने के लिए किराए पर सीमा (Rent Cap) लगाने की माँग की है।
आवास संकट को लेकर देश में राजनीतिक बहस तेज़ होती जा रही है, जबकि बढ़ते किराए आम लोगों, विशेषकर युवा और मध्यम आय वर्ग के लिए एक गंभीर चुनौती बने हुए हैं।