नोएडा के निठारी गांव में हुए बहुचर्चित और दिल दहला देने वाले सीरियल मर्डर केस में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को मोनिंदर सिंह पंढेर और उनके घरेलू सहायक सुरेंद्र कोली को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने सबूतों की कमी और जांच में खामियों को आधार मानते हुए निचली अदालत के फैसले को पलट दिया। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ खड़ा हुआ है कि अगर ये दोनों दोषी नहीं हैं, तो फिर निठारी कांड का असली गुनहगार कौन है?
साल 2006 में नोएडा के निठारी गांव में बच्चों और महिलाओं के गायब होने की खबरें सामने आने लगीं। बाद में पंढेर के घर के पीछे बने नाले से कई मानव अवशेष बरामद हुए। मामले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। CBI ने जांच की कमान संभाली और सुरेंद्र कोली को मुख्य आरोपी बताया, जबकि पंढेर को सहआरोपी के तौर पर शामिल किया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि:
फॉरेंसिक और डीएनए जांच में भारी चूक हुई।
पुलिस ने दबाव में जल्दबाजी में चार्जशीट दाखिल की।
गवाहों के बयान पर संदेह की गुंजाइश थी।
पूरी प्रक्रिया में निष्पक्षता का अभाव रहा।
अगर पंढेर और कोली निर्दोष हैं या उनके खिलाफ सबूत अपर्याप्त हैं, तो निठारी में जिन 19 से ज्यादा मासूमों की हत्याएं हुईं, उनका इंसाफ कौन दिलाएगा? क्या असली गुनहगार अब भी खुलेआम घूम रहा है? क्या पुलिस और CBI की जांच में कहीं कुछ छूट गया?
निठारी पीड़ित परिवारों के लिए यह फैसला एक बार फिर जख्मों को हरा करने वाला है। उनका अब भी यही सवाल है – "हमारे बच्चों के कातिलों को सजा कब मिलेगी?"
विशेषज्ञों की राय में अब इस केस की फिर से निष्पक्ष जांच की जरूरत है, ताकि सच सामने आ सके और न्याय हो।