नई दिल्ली, 3 सितम्बर 2025 –
त्योहारी सीज़न से पहले आम उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देने के लिए जीएसटी काउंसिल ने कर ढांचे में ऐतिहासिक बदलाव की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। बैठक में 175 से अधिक वस्तुओं पर जीएसटी दरों में कमी की सिफारिश पर विचार किया जा रहा है। यदि प्रस्ताव पास होता है, तो घरेलू बजट पर दबाव झेल रहे उपभोक्ताओं के लिए यह किसी “त्योहार का तोहफ़ा” साबित हो सकता है।
सूत्रों के मुताबिक, टैक्स कटौती की सूची में रोज़मर्रा की ज़रूरतों से लेकर इलेक्ट्रॉनिक उपकरण तक शामिल हैं। प्रमुख वस्तुएँ इस प्रकार हैं:
डेयरी उत्पाद: घी, मक्खन, पनीर जैसी आवश्यक चीज़ें।
घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स: एयर कंडीशनर (AC), फ्रिज और टेलीविज़न (TV)।
पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स: टूथपेस्ट, शैम्पू, टैल्कम पाउडर आदि।
ऑटोमोबाइल सेक्टर: विशेषकर हाइब्रिड और छोटी कारों पर कर घट सकता है।
इन वस्तुओं पर कर में 10 प्रतिशत अंकों तक की कटौती की संभावना है।
काउंसिल का मकसद दोहरा है:
त्योहारी सीज़न से पहले उपभोक्ताओं को राहत देना, जिससे मांग और ख़रीददारी बढ़ सके।
कर संरचना को सरल बनाना, ताकि अनुपालन आसान हो और व्यापारियों के लिए कर व्यवस्था पारदर्शी बने।
इस बैठक में 4-स्तरीय ढांचे (5%, 12%, 18%, 28%) को बदलकर 2-स्तरीय ढांचा (5% और 18%) बनाने पर भी विचार हो रहा है। “पाप और लक्ज़री” वस्तुओं पर 40% तक कर लगाने की संभावना है।
FMCG कंपनियाँ: टूथपेस्ट, साबुन, शैम्पू जैसी वस्तुओं पर कर घटने से बिक्री में भारी बढ़ोतरी हो सकती है।
इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग: AC, TV और फ्रिज सस्ते होने से घरेलू बिक्री तेज़ होगी।
ऑटोमोबाइल सेक्टर: हाइब्रिड और छोटी गाड़ियों की बिक्री में तेज़ी आ सकती है, जिससे पर्यावरण-हितैषी वाहनों को बढ़ावा मिलेगा।
केंद्र सरकार का मानना है कि भले ही अल्पकाल में कुछ राजस्व हानि हो, लेकिन बढ़ती मांग और आर्थिक गतिविधि से यह घाटा पूरा हो जाएगा।
राज्य सरकारें राजस्व में कमी की आशंका से चिंतित हैं और मुआवज़े की मांग उठा रही हैं। उदाहरण के तौर पर, कर्नाटक ने ₹15,000 करोड़ तक के घाटे की आशंका जताई है।
उपभोक्ता: रोज़मर्रा का सामान और इलेक्ट्रॉनिक्स सस्ते होंगे, जिससे घरेलू बजट पर सीधा असर पड़ेगा।
बाज़ार: दिवाली से पहले मांग बढ़ने से शेयर बाज़ार में FMCG और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों के शेयर मज़बूत हो सकते हैं।
समग्र अर्थव्यवस्था: उपभोग आधारित वृद्धि को नई गति मिल सकती है।
जीएसटी काउंसिल की यह बैठक सिर्फ टैक्स दरों की समीक्षा नहीं है, बल्कि भारत की कर व्यवस्था को सरल और उपभोक्ता-केंद्रित बनाने की एक बड़ी पहल है। अगर प्रस्ताव पारित होता है, तो आने वाले त्योहारी सीज़न में उपभोक्ताओं को “दोहरी दिवाली” का तोहफ़ा मिल सकता है—सस्ती वस्तुएँ और मज़बूत अर्थव्यवस्था।